प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच इस हफ्ते होने वाली अनौपचारिक शिखर वार्ता से पहले चीन के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा कि डोकलाम विवाद भारत और चीन के बीच ‘ परस्पर विश्वास की कमी ’ के कारण हुआ. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने और धीरे-धीरे सीमा विवाद का हल करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है. भारत और चीन के सैनिकों के बीच पिछले साल सिक्किम के पास डोकलाम इलाके में तनातनी हुई थी और दो महीने से ज्यादा समय तक गतिरोध बना रहा था.

उप विदेश मंत्री कोंग ने डोकलाम विवाद के बारे में पूछे जाने पर मीडिया से कहा , ‘ पिछले साल ( डोकलाम में ) सीमा पर हुई घटना से एक तरह से दोनों देशों के बीच परस्पर विश्वास की कमी का पता चलता है.’ यह पूछे जाने पर कि क्या बातचीत में डोकलाम मुद्दा और सीमा विवाद का मुद्दा भी उठेगा.

कोंग ने कहा कि दोनों नेताओं ने अनौपचारिक शिखर वार्ता करने का फैसला किया ‘ इसलिए नहीं कि सीमा से जुड़े सवाल अब भी अनसुलझे हैं और अनौपचारिक शिखर वार्ता के दौरान हमें इसके बारे में बात करने की जरूरत है, बल्कि इसलिए क्योंकि दोनों देश विदेश रणनीति में एक दूसरे को बेहद महत्व देते हैं.’

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भारत – चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब 3,488 किलोमीटर लंबे हिस्से पर विवाद है. दोनों देश इसके हल के लिए विशेष प्रतिनिधियों के बीच 20 चरणों की बातचीत कर चुके हैं. कोंग ने कहा , ‘ साफ तौर पर सीमा से जुड़ा सवाल महत्वपूर्ण है.

दोनों देशों को अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने के लिए मिलकर काम करना होगा और धीरे धीरे इसका हल करना होगा. सीमा विवाद के उचित समाधान से दोनों देशों के बीच सहयोग एवं परस्पर समझ गहरा होगी और आपसी विश्वास बढ़ेगा.’ उन्होंने कहा कि भारत और चीन को परस्पर विश्वास बढ़ाने के लिए और ज्यादा प्रयास करने की जरूरत है.