तो इसलिए भारत से डरा चीन, सामने आई ये चौका देने वाली वजह…

अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के न्यूक्लियर सबमरीन समझौते से भड़के चीन ने अब भारत के मिसाइल कार्यक्रम पर सवाल उठाया है. चीन ने साल 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद जारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव का हवाला देते हुए ये चिंता जाहिर की है. रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत आने वाले दिनों में अग्नि-V इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण कर सकता है.

भारत की इस टेस्टिंग से चीन के कई शहर आएंगे रेंज में

बता दें कि चीनी मीडिया में भारत की इस 5000 किलोमीटर रेंज वाली न्यूक्लियर मिसाइल को लेकर काफी चर्चा है क्योंकि इस रेंज में चीन के कई शहर भी आते हैं. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Zhao Lijian ने भारत के आगामी मिसाइल परीक्षण को लेकर कहा कि जहां तक ​​भारत की न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल का सवाल है, UNSCR 1172 में पहले से ही स्पष्ट शर्तें मौजूद हैं. दक्षिण एशिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना सभी देशों की जिम्मेदारी है और चीन उम्मीद करता है कि सभी देश इस मामले में लगातार प्रयास करेंगे.

गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जून 1998 में अपनाए गए UNSC प्रस्ताव 1172 का जिक्र कर रहे थे. 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों के बाद इस प्रस्ताव को लाया गया था. इस प्रस्ताव में लिखा था कि भारत और पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार विकास कार्यक्रम को तुरंत बंद करेंगे और न्यूक्लियर शस्त्रीकरण से परहेज करेंगे.

इसके अलावा परमाणु हथियारों की तैनाती, बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास और परमाणु हथियारों के लिए इस्तेमाल में होने वाली सामग्री के किसी भी रूप में उत्पादन पर भी रोक लगाई जाएगी. इसके अलावा उन उपकरणों, सामग्रियों या टेक्नोलॉजी को निर्यात ना करने की पॉलिसी पर भी अटल रहने की बात कही गई थी जिनसे न्यूक्लियर हथियारों का निर्माण हो सकता है.

भारत पर सवाल, पाकिस्तान को समर्थन?

जहां भारत के मिसाइल कार्यक्रम के संबंध में चीन यूएनएससी प्रस्ताव का हवाला दे रहा है, वहीं चीन पिछले कुछ दशकों से पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों में सहायता करता आया है. चीन ने इस मामले में पाकिस्तान को यूरेनियम की सहायता पहुंचाई है. इसके अलावा न्यूक्लियर मिसाइलों के लिए टेक्नोलॉजी भी उपलब्ध कराई है.

चीन का पाकिस्तान को ये सहयोग बेरोकटोक जारी है और तीन साल पहले इसे आधिकारिक तौर पर भी स्वीकार कर लिया गया था. साल 2018 में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त चीन एकेडमी ऑफ साइंस ने घोषणा की थी कि उसने पाकिस्तान को एक ट्रैकिंग सिस्टम बेचा है जो पाकिस्तान को मल्टी-वॉरलेड मिसाइलों के विकास में काफी मदद कर सकता है.

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