नई दिल्ली. स्वादिष्ट सूप और घर की सजावट के लिए हर साल देश से दस हजार कछुओं की तस्करी चीन और थाईलैंड के लिए की जाती है। घर की सजावट के लिए उन कछुओं का इस्तेमाल होता है, जिनके शरीर में स्टार का निशान होता है। वहीं दूसरी प्रजाति के कछुओं का इस्तेमाल सूप बनाने के लिए होता है। यह खुलासा वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और कस्टम द्वारा पकड़े गए कंसाइनमेंट और स्टडी में दौरान सामने आया है। स्टडी में सामने आया है कि तस्कर उत्तर प्रदेश के बरेली और उन्नाव सहित चेन्नई के विभिन्न हिस्सों से कछुओं को एकत्रित करते हैं। घर की सजावट के लिए कछुओं को जीवित रखा जाता है, जबकि सूप के इस्तेमाल होने वाले कछुओं की हत्या कर दी जाती है।

वाइल्डलाइफ स्मगलिंग को रोकने के लिए आईजीआई एयरपोर्ट पर तैनात कस्टम विभाग की टीम ने एयरपोर्ट पर तैनात अन्य एजेंसियों के साथ हाथ मिलाया है। इसी कवायद के तहत कस्टम ने मंगलवार को आईजीआई एयरपोर्ट पर सहयोगी एजेंसियों के लिए सेमीनार का आयोजन किया था। इसमें सीआईएसएफ, इमीग्रेशन, डायल सिक्योरिटी, कस्टम और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारियों ने भाग लिया। इसमें जीव-जंतुओं की स्मगलिंग के तरीकों, रूट, स्क्रीनिंग के दौरान उनकी एक्स-रे में इमेज सहित अन्य पहलुओं से अवगत कराया।
एडिशनल कमिश्नर कस्टम डॉ. अमनदीप सिंह ने इस दौरान बताया कि वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए इस तरह के प्रयास आवश्यक हो गए हैं। हर साल करीब 350 मिलियन प्लांट और वन जीव अवशेषों की तस्करी विदेशों में की जा रही है। जिसको रोकने के लिए सभी एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।
वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के इंस्पेक्टर आरएस शरद ने तस्करी के तरीकों एवं विभिन्न रूट के बारे में जानकारी दी। वहीं कस्टम विभाग के डिप्टी कमिश्नर डॉ. अनीस सी ने वन्य जीवों की कैसे पहचान की जाए और कैसे तस्करों को पकड़ा जाए, इस बाबत जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान सीआईएसएफ की तरफ से कमांडेंट अरुण कुमार भी मौजूद थे।
ऐसे होगी तस्करों की धरपकड़
कछुओं की तस्करी करने वाले तस्करों की धरपकड़ करने के लिए कस्टम के डिप्टी कमिश्नर डा. अनीस सी ने सीआईएसएफ, डायल सिक्योरिटी और इमीग्रेशन की टीम को तीन रास्ते सुझाए हैं। जिसमें मुसाफिरों की प्रोफाइलिंग के साथ एक्स-रे और डाग स्क्वायड की मदद लेना शामिल है। कस्टम ने एयलाइंस और साथी एजेंसियों को कहा है कि वह ऐसे मुसाफिरों की लिस्ट तैयार करें जो लगातार बीजिंग और बैंकाक के बीच हवाई यात्रा कर रहे हैं। इसके अलावा, एक्स-रे के दौरान इन दोनों देश जाने वाले मुसाफिरों के बैगेज के एक्स-रे में खास एहतियात बरतने को भी कहा गया है। कस्टम ने सुरक्षा एजेंसियों को कुछ एक्स-रे इमेज भी मुहैया कराए हैं। जिनकी मदद से कछुए की कंसाइनमेंट को आसानी से पकड़ा जा सकता है।
इन रास्तों से होती है कछुओं की तस्करी
वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के इंस्पेक्टर आरएस शरथ के अनुसार कछुओं की तस्करी के लिए सड़क के साथ हवाई मार्ग का भी इस्तेमाल किया जाता है। सड़क मार्ग से कछुओं को देश के विभिन्न हिस्सों से पहले कोलकाता भेजा जाता है। जहां से इन्हें बांग्लादेश, मलेशिया, सिंगापुर के रास्ते बैंकाक भेजा जाता है। साथ ही बताया कि बीते दिनों कुछ कछुओं के ऐसे कंसाइनमेंट को बीजिंग में पकड़ा गया है, जिन्हें बैंकाक से भेजा गया था। वहीं हवाई मार्ग से तस्करी के लिए दिल्ली, चेन्नई और मुंबई एयरपोर्ट को ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।