ड्राइवर की छोटी सी गलती से बिछ गई मासूमों की लाशें, ये तस्वीरें रुला देगी आपको

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में आज ट्रेन और बस की टक्कर में जिन 13 बच्चों की मृत्यु हुई, उनमे से तीन परिवारों के सात बच्चे सगे भाई बहन थे।  दुर्घटनास्थल पर यहां वहां पड़े बैग, कापी, किताबे और टिफिन बाक्स इस बात की तस्दीक कर रहे थे कि हादसा किस कदर भयावह रहा होगा। 
इस हादसे की दर्दनाक तस्वीरें सामने आई है जिसमें आप देख सकते हैं कि हादसा कितना भयानक होगा। हादसे के बाद मासूमों की लाशें बिछ गई थी। बच्चों के मां-बाप का रो-रो कर बुरा हाल था। 
रेल क्रासिंग के इर्द गिर्द पड़े खून की छींटे और खस्ताहाल बस के अवशेष दुर्घटना स्थल की विकृत तस्वीर बयां करने के लिये काफी थे।  इस हादसे में मिश्रौली गांव के प्रधान अमर जीत सिंह के दो लड़के और एक बेटी की मृत्यु हो गई। 

बड़ा हादसा: कुशीनगर में ट्रेन की चपेट में आने से स्कूली वाहन सवार 13 बच्चों की मौत, मचा कोहराम

रो रो कर बेहाल हो रहे अमरजीत ने कहा विश्वास नहीं होता कि मेरे लाडले संतोष, रवि और रागिनी अब इस दुनिया में नहीं है। तीनो भाई बहन पढने में अव्वल थे। घर की रौनक थे मेरे लाडले। 
अब जीने का मकसद ही नहीं रह गया जिसके लिए जी रहे थे वही नहीं रहे। यही स्थिति कोकिल पटटी निवासी नौशाद की है जिसके दो होनहार बेटे अतीउल्लाह और गोल्डन इस दुर्घटना में उनसे हमेशा के लिए बिछुड गए।
बच्चों के शव देखते ही मां बेहोश हो गई जिसे पड़ोसी संभालने की कोशिश कर रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि नौशाद के बच्चे होनहार और मिलनसार थे। वे पूरे गांव के लाडले थे। 
गांव का हर शख्स उन्हे बेहद प्यार करता था। बतरौली निवासी हसन के घर भी कोहराम मचा हुआ था उनके पुत्र साजिद और तमन्ना बस हादसे का शिकार बने।
बदहवास हसन ने कहा मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई। आज भोर तक जिन बच्चों के शोर से घर का चप्पा चप्पा गूंजा करता था। कल के बाद वहां वीरानी छाई रहेगी। मेरी जिंदगी का सहारा हमसे बिछड़ गया। अब जीने की कोई तमन्ना नही है। अल्लाह हमें भी इस दुनिया से रूखसत करे। 
इसके अलावा मनोज (08) और मुस्कान (07) भाई बहन है जो महिराणा के निवासी हैं। मृत बच्चों में हरिओम (08), अरशद (09), अनस (08), गोलू शामिल है।  
वहीं इस हादसे का पहला कारण सामने आया है। दरअसल, हादसा ड्राइवर की गलती की वजह से हुआ है। बताया जा रहा है कि ड्राइवर ने ईयरफोन लगा रखे थे और इसके कारण उसे ट्रेन की आवाज सुनाई नहीं दी। 
वहीं बस में बैठे बच्चे भी उसे आवाज देकर आगाह करने की कोशिश करते रहे, लेकिन वो सुन नहीं सका और इतना दर्दनाक हादसा हो गया। ड्राइवर की आयु को लेकर भी कुछ बातें सामने आ रही हैं। गोरखपुर कमिश्नर (आयुक्त) को जांच के आदेश दिए गए हैं।

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