शनिश्चरी अमावस्या: अगर पितृ दोषों को करना हैं दूर तो आज करे ये 5 उपाय

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आज 11 अगस्त दिन शनिवार को शनिश्चरी अमावस्या पड़ रही है। यह दिन शनि और पितृ दोषों से मुक्ति के लिए यह अच्छा समय है, तो ये 5 उपाय कर सकते हैं।शनिश्चरी अमावस्या: अगर पितृ दोषों को करना हैं दूर तो आज करे ये 5 उपाय

चंडीगढ़ में सेक्टर-30 स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र कहते हैं कि शनिश्चरी अमावस्या के दिन शास्त्रों में बताए गए उपायों को करने से शनि की साढ़ेसाती आदि के प्रभाव कम होते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन शनि के बीज मंत्र ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ या सामान्य मंत्र ‘ॐ शं शनैश्चराय नम:’ का जप करने से शनि और पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है।

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे काली बाती बनाकर सरसों तेल का दीप जलाएं। पीपल को जल और काली चिंटियों गुड़ दें तो शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है। पीपल के पत्तों पर मिठाई रखकर पितरों का ध्यान करें तो पितृदोष भी दूर होता है। शनि दोष से मुक्ति के लिए शनिवार के दिन चमड़े के जूते चप्पल दान करना भी अच्छा रहता है।

इसके साथ आप शमी के पेड़ की भी पूजा कर सकते हैं। इस दिन घर में शमी का पेड़ लगाना भी शुभ फलदायी रहेगा। महाबलि हनुमानजी की स्तुति से भी लाभ मिलता है। शनिवार के दिन काली गाय की सेवा करने से भी लाभ होता है। उसे रोटी खिलाएं और माथे पर सिंदूर का तिलक लगाएं।
शनिश्चरी अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ पर सात प्रकार का अनाज चढ़ाएं और इसे जरूरतमंदों में बांट दें, इससे ग्रहण का दान और शनि के उपाय दोनों हो जाएंगे। इस उपाय से शनि के साथ पितृगण भी खुश होंगे।

पौराणिक कथा के अनुसार, हनुमानजी ने शनिदेव को लंकापति रावण की कैद से मुक्त कराया था। ऐसे में लगातार कैद में रहने से उन्हें काफी पीड़ा हो रही थी तो हनुमानजी ने उनके शरीर पर तेल का लेप लगाया, जिससे शनिदेव को काफी राहत मिली। इसलिए हनुमानजी की पूजा करने से शनि दोष से हो रही पीड़ा से भी शांति मिलती है। तभी से शनिवार के दिन तेल चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है। इसके साथ ही ऐसा माना जाता है कि हनुमानजी के भक्तों को शनिदेव की कुदृष्टि कभी नहीं झेलनी पड़ती है।

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