वैज्ञानिकों को मिली सुपर वैक्सीन बनाने में कामयाबी, रूप बदलेगा वायरस तो भी मारने में सक्षम

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच सभी को इसकी एक कारगर और सुरक्षित वैक्सीन का इंतजार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 10 से ज्यादा वैक्सीन कामयाबी के करीब हैं। उम्मीद की जा रही है कि तमाम जरूरी परीक्षणों से गुजरने के बाद हमारे पास अगले कुछ महीनों के अंदर एक शानदार वैक्सीन उपलब्ध होगी। इधर, वायरस का म्यूटेशन यानी रूप बदलना भी कोरोना नियंत्रण के लिए एक चुनौती की तरह है। चर्चा इस बात की भी हो रही है कि तैयार की जा रही वैक्सीन वायरस के बदले स्वरूप पर कितनी असरदार होगी। वैक्सीन विकसित करने के दौरान वैज्ञानिक इस बात का भी ध्यान रख रहे हैं। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने कोरोना की एक ऐसी शानदार वैक्सीन बना लेने का दावा किया है, जो सामान्य से ‘कई गुना ज्यादा’ एंटीबॉडीज पैदा करती है। 

खबरों के मुताबिक, इस वैक्सीन का जानवरों पर परीक्षण हो चुका है और परीक्षण के नतीजे चौंकाने वाले रहे हैं। शोधकर्ताओं में यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के कुछ विशेषज्ञ भी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि नैनो पार्टिकल्स से बनी कोरोना की नई वैक्सीन चूहों में उन लोगों से कई गुना ज्यादा न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज पैदा करने में सक्षम है, जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं। 

स्वास्थ्य रिसर्च जर्नल ‘सेल’ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक चूहों में वैक्सीन की डोज छह गुना कम करने पर भी 10 गुना ज्यादा न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज विकसित हुई हैं। इसके साथ ही वैक्सीन ने शक्तिशाली B-सेल इम्यून रेस्पांस भी दिखाया है। इससे वैक्सीन के लंबे समय तक असरदार रहने की उम्मीद जताई जा रही है। 

शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब एक बंदर को वैक्सीन दी गई दी तो उसने शरीर में बनीं एंटीबॉडीज ने कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन पर हर तरफ से हमला किया। इसी आधार पर शोधकर्ता दावा कर रहे हैं कि वैक्सीन वायरस के म्यूटेटेड स्ट्रेन यानी बदले स्वरूप के प्रति भी सुरक्षा दे सकती है। बता दें कि स्पाइक प्रोटीन के जरिए ही वायरस इंसानी कोशिका में घुसता है। 

कैसे बनाई गई वैक्सीन?
यह वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन के रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन के 60 फीसदी हिस्से की नकल करती है। वैक्सीन तैयार करने के लिए शोधकर्ताओं ने वायरस के पूरे स्पाइक प्रोटीन का इस्तेमाल नहीं किया। वैज्ञानिकों ने ‘स्ट्रक्चर-बेस्ड वैक्सीन डिजाइन टेक्नीक्स’ का यूज किया, जिसके चलते वह खुद को असेंबल करने वाला प्रोटीन बना पाए, जो वायरस जैसा दिखता है। वैज्ञानिकों ने फिर इस वैक्सीन का SARS-Cov-2 के स्पाइक प्रोटीन पर टेस्ट किया तो बेहतर नतीजे सामने आए।

अध्ययन के मुताबिक, इस वैक्सीन का मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर काफी हद तक एक वायरस की नकल करता है, जिसकी वजह से वैक्सीन की इम्यून रेस्पांस ट्रिगर करने की क्षमता बढ़ गई है। इस अध्ययन के सह-लेखक नील किंग ने कहा, “हमें उम्मीद है कि हमारे नैनो पार्टिकल प्लेटफॉर्म से इस महामारी से लड़ने में मदद मिलेगी।” इस वैक्सीन का लाइसेंस यूनिवर्सिटी बिना किसी शुल्क के देने को तैयार है। वैक्सीन कब तक आएगी, इस बारे में अभी कुछ तय नहीं है। इस वैक्सीन को कई तरह के परीक्षणों से गुजरना बाकी है।

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