तमिलनाडु में स्कूल स्वीपर ने कुछ इस तरह बचाई बच्चों की जान

गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में लाल किले पर तिरंगे को सलामी देने के साथ जिन वीरों को सम्मानित किया गया, उन्हें तो पूरा देश नमन करता ही है, लेकिन तमिलनाडु के तटवर्ती नागापट्टिनम जिले के एक छोटे से गांव में स्कूल की एक स्वीपर ने जो किया, वह उन शूरवीरों से कहीं कम नहीं है.

नागापट्टिनम जिले के उत्तरी मारुतुर गांव में स्थित एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में साफ सफाई का काम करने वाली नागम्मल ने सूझबूझ से काम न लिया होता तो कितनी मासूम जिंदगियां खत्म हो जातीं, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. दरअसल नागम्मन गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले गुरुवार को जब स्कूल पहुंची और पानी के लिए नल खोला तो उन्हें पानी में से अजीब सी गंध आई.

तब तक बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे थे. नागम्मन को कुछ संदेह हुआ और उन्होंने तुरंत हेडमास्टर को इसकी सूचना दी. हेडमास्टर ने इसकी सूचना पुलिस को दी और स्कूल में छुट्टी की घोषणा कर दी गई. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जब पानी के सैंपल टेस्ट के लिए लैब भेजा तो पैर के नीचे से जमीन खिसक गई.

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दरअसल, पानी में खर-पतवार नाशक क्लोरासीटानिलिड हर्बिसाइड नामक विषैला पदार्थ मिलाया गया था, जो बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता था. पुलिस ने संदेह व्यक्त किया है कि कुछ अराजक तत्वों ने यह गंदा काम किया है. पुलिस आरोपियों की तफ्तीश में जुट गई है.

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह विषैला पानी पीने से नर्वस सिस्टम को गंभीर क्षति पहुंच सकती थी, पाचनतंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ सकता था, कोमा की स्थिति भी पैदा हो सकती थी, यहां तक जीवन के लिए भी खतरा पैदा हो सकता था.

अगले दिन उत्तरी मारुतुर में पंचायत यूनियन स्कूल द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में नागम्मन को सम्मानित किया गया. पैरेंट्स-टीचर्स एसोसिएशन ने भी बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए नागम्मन को उनकी सूझबूझ के लिए सम्मानित किया.

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