हरियाणा में 5500 पदों पर हो रही पुरुष कांस्टेबल की भर्ती को लेकर एक बार फिर बनी विवाद की स्थिति

हरियाणा में 5500 पदों पर हो रही पुरुष कांस्टेबल की भर्ती को लेकर एक बार फिर विवाद की स्थिति बन गई है। पिछली बार अजीबो-गरीब सवाल पूछकर हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को कठघरे में खड़ा होना पड़ा था, जिसके बाद पेपर तैयार करने वाली प्राइवेट एजेंसी को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था। इस बार कांस्टेबल की भर्ती के लिए हुई लिखित परीक्षा में न केवल बहुत अधिक कठिन सवाल पूछे गए, बल्कि हरियाणा के सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल पूरी तरह से गायब हो गए। इसका नुकसान यह होगा कि लिखित परीक्षा देने वाले हरियाणा से बाहर के युवाओं को ज्यादा फायदा होगा और हरियाणा के युवाओं को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।

कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन भोपाल सिंह खदरी, गृह सचिव राजीव अरोड़ा और पुलिस महानिदेशक पीके अग्रवाल समेत मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों तथा पुलिस विभाग के अधिकारियों को खुली चुनौती दी है कि वह इस पेपर में से 30 फीसद सवाल हलकर दिखा दें तो वह आज तक लगाए गए अपने तमाम आरोपों को माफी के साथ वापस ले लेंगे। सुरजेवाला से पहले रविवार की रात को श्वेता ढुल नाम की एक सामाजिक कार्यकर्ता ने फेसबुक पर आनलाइन आकर पुलिस भर्ती के लिए पूछे गए सवालों पर कड़ी आपत्ति जाहिर की थी।

हरियाणा में 5500 पुरुष कांस्टेबल की भर्ती होनी है, जिसकी परीक्षा का री-शेड्यूल 31 अक्टूबर, एक नवंबर और दो नवंबर है। पेपर लीकेज और नकल माफिया पर अंकुश लगाने के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने इस बार के पेपर में नया प्रयोग किया है। इसके तहत सुबह और शाम की पालियों में चार-चार अलग-अलग तरह के पेपर दिए गए। यानी एक पाली में जितने भी युवाओं ने परीक्षा दी, उनके पास अलग-अलग तरह के चार प्रश्नपत्र थे। ऐसा ही शाम की पाली में हुआ।

आयोग के चेयरमैन भोपाल सिंह खदरी का मानना है कि ऐसा करने से नकल रुकेगी तथा पेपर लीकेज माफिया पर पूरी तरह से अंकुश लग जाएगा, लेकिन रणदीप सिंह सुरजेवाला ने साफतौर पर कहा कि अमूमन ऐसा होता है कि प्रश्नपत्र तो एक ही तरह का होता है, लेकिन उसके सवाल ऊपर-नीचे हो जाते हैं, मगर आयोग ने एक परीक्षा में चार तरह के प्रश्नपत्र देकर उत्तर पुस्तिकाएं (ओएमआर) शीट खाली छोड़कर आने वालों के लिए मनमर्जी की भर्ती का नया रास्ता खोल दिया है।

हरियाणा में कांस्टेबल भर्ती के लिए आठ लाख 39 हजार युवाओं ने आवेदन कर रखा है। 31 अक्टूबर को हुई परीक्षा में बुलाए गए युवाओं में से 40.5 फीसद युवा ही परीक्षा देने आए। सेंटर अधिक दूरी पर होने को भी इसकी वजह माना गया है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि एक तो बहुत ज्यादा कठिन सवाल और ऊपर से पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्नों ने युवाओं की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है। पुरुष पुलिस कांस्टेबल की भर्ती के लिए आइएएस और आइपीएस की परीक्षा से भी ज्यादा मुश्किल सवाल पूछे गए हैं। इससे साधारण युवा भर्ती से खुद ही बाहर हो जाएंगे। दो पालियों की परीक्षा में आठ अलग-अलग प्रश्नपत्र होने का मतलब साफ है कि नार्मलाइजेशन नहीं हो सकेगा और उस रिजल्ट को आयोग कैसे कंपाइट करेगा, यह बड़ा सवाल है।

परीक्षा के पाठ्यक्रम को लेकर चेयरमैन और सुरजेवाला के दावे-प्रतिदावे

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन भोपाल सिंह खदरी का कहना है कि हमने पुलिस समेत सभी विभागों की भर्ती के लिए एक जैसा पाठ्यक्रम करने के लिए मुख्य सचिव के माध्यम से पत्र लिखने की तैयारी की है। उन्होंने माना कि परीक्षा में हरियाणा के जीके (सामान्य ज्ञान) से जुड़े सवालों की कमी थी, लेकिन कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि सिर्फ मानने से कुछ नहीं होगा, कार्यवाही करनी होगी, यह हरियाणा के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। सुरजेवाला ने कहा कि हमने जब पुलिस सब इंस्पेक्टर पुरुष के 450 पदों के लिए तीन परीक्षा केंद्रों का गड़बड़झाला उजागर किया तो पेपर कैंसल करने की बजाय उन तीन केंद्रों के 550 परीक्षार्थियों का पेपर दोबारा लिया गया। कमाल यह हुआ कि इनमें से 43 सब इंस्पेक्टर चयनित हो गए। यानी भर्तियों में पूरी तरह से गोलमाल किया जा रहा है।

हरियाणा के सवाल गायब, पीएचडी और विज्ञान विषयों के सवालों की भरमार

कांग्रेस महासचिव ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 31 अक्टूबर को जिन युवाओं ने पुलिस कांस्टेबल की परीक्षा दी है, उन्हें जब आठ अलग-अलग पेपर दिए गए तो उनकी योग्यता की बराबरी का क्या मापदंड या पैमना होगा। इस परीक्षा में हरियाणा का सामान्य ज्ञान, हरियाणा की भौगोलिक स्थिति व सामाजिक तथा राजनीतिक परिस्थिति, भारतीय दंड संहिता से जुड़े सवाल, संविधान में मौलिक अधिकारों से जुड़े सवाल, मानव अधिकारों से जुड़े सवाल तथा सामाजिक समरसता से जुड़े प्रश्न पूछे जाने चाहिएं थे, लेकिन इन सभी विषयों को छोड़कर एमए, पीएचडी, बोटनी, जूलोजी, सोशयोलाजी, इंटरनेशनल हिस्टरी, इंटरनेशनल जीके और एमएससी मैथेमेटिक्स से जुड़े सवाल पूछे गए हैं, जो युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है।

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