2018-19 के लिए रिकॉर्ड खाद्यान्न 28 करोड़ मीट्रिक टन से ज़्यादा उत्पादन की संभावना

देश में 2018-19 के फ़सली सीज़न (जुलाई से जून) के लिए रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. देशभर में इस वर्ष बेहतर मॉनसून की भविष्यवाणी से गदगद कृषि मंत्रालय ने ये लक्ष्य तय किया है. हालांकि सरकार ने मॉनसून की कमी के हालत से निपटने के लिए भी देशभर के लिए इमरजेंसी योजना भी तैयार कर ली है.

28 करोड़ मीट्रिक टन से ज़्यादा उत्पादन का लक्ष्य

कृषि मंत्रालय ने अगले साल यानि 2018-19 के दौरान 28.7 करोड़ मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है जो आज तक का रिकॉर्ड उत्पादन होगा. इसमें ख़रीफ़ फ़सलों (चावल और अन्य) का योगदान 14 करोड़ मीट्रिक टन और रबी फ़सलों (गेहूं और अन्य) का योगदान 14.2 करोड़ मीट्रिक टन रह सकता है. इस दौरान चावल का उत्पादन 11.3 करोड़ मीट्रिक टन जबकि गेहूं का उत्पादन 10 करोड़ मीट्रिक टन रहने का अनुमान है. इस तरह 2018-19 में खाद्यान्न पिछले साल के मुक़ाबले क़रीब 60 लाख मीट्रिक टन ज़्यादा रहने का अनुमान है.

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2017 -18 में भी रिकॉर्ड उत्पादन रहने का अनुमान
मंत्रालय के मुताबिक़ इस साल (2017-18) भी देश में 27.75 करोड़ मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान लगाया गया है. इसमें चावल का उत्पादन 11 करोड़ मीट्रिक टन जबकि गेहूं का उत्पादन 9.8 करोड़ मीट्रिक रहने का अनुमान है. ख़ास बात ये है कि इस दौरान दालों का उत्पादन भी क़रीब 2.9 करोड़ मीट्रिक टन रहने का अनुमान है.

इस साल अच्छे मॉनसून की संभावना से जगी उम्मीद

मौसम विभाग ने इस साल देश में सामान्य से बेहतर मॉनसून की संभावना जतायी है. अनुमान के मुताबिक़ मानसून इस साल सामान्य का 97 फ़ीसदी रह सकता है जिसे खेती के लिए काफ़ी अच्छे संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. कृषि मंत्रालय को इसी के चलते इस साल अच्छी फ़सल की उम्मीद है. आज दिल्ली में ख़रीफ फसलों पर राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा – “इस साल जो मौसम विभाग ने मॉनसून का अनुमान लगाया है उससे हम आशान्वित हैं और अच्छे खाद्यान्न उत्पादन की संभावना बढ़ी है “. हालांकि पिछले सालों को देखते हुए सरकार ने अपनी तरफ़ से मॉनसून में बदलाव के हालात से निपटने के लिए एक इमरजेंसी प्लान भी तैयार कर लिया है. हैदराबाद स्थित सेंट्रल रिसर्च इंस्टिच्यूट फॉर ड्राईलैंड एग्रीकल्चर ने देश के 623 ज़िलों के लिए ये प्लान तैयार किया है जिसमें बीजों की कमी से लेकर सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था को शामिल किया गया है.

किसानों को लागत से डेढ़ गुना मुनाफा जल्द घोषित करेगी सरकार

कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने सम्मेलन में कहा कि सरकार सभी अधिसूचित फसलों पर लागत से डेढ़ गुना मुनाफा जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने का अपना वादा जल्द ही पूरा करेगी. संभावना है कि अगले महीने शुरू हो रहे ख़रीफ़ सीज़न से पहले मोदी सरकार चावल और दाल समेत सभी ख़रीफ़ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ज़िक्र करते हुए राधा मोहन सिंह ने दावा किया कि कृषि और किसानों की उन्नति के लिए सरकार के पास पैसों की कोई कमी नहीं है क्योंकि सरकारी ख़ज़ाने पर पहला हक़ किसानों का है. पहले की युपीए सरकार पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि उस समय केवल कृषि मंत्री को ही लोग जानते थे लेकिन अब कृषि मंत्री को कम और कृषि मंत्रालय और उससे जुड़ी योजनाओं को ज़्यादा किसान जानते हैं.

 
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