MP: मतदाता सूची में सात लाख फर्जी नामों के आरोपों को रावत ने नकारा

भोपाल। चुनाव के दौरान हटाए गए अधिकारियों की दोबारा उसी जगह पदस्थापना के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा है कि हमारा क्षेत्राधिकार चुनाव तक सीमित है। यदि हमें लगता है कि संबंधित अधिकारी के रहने से चुनाव प्रभावित हो सकता है तो उसे हटाने के लिए कहा जाता है। चुनाव के बाद सरकार उसे वहीं पदस्थ करती है, इससे हमें कोई मतलब नहीं। यह तो कानून बनाने वालों का मुद्दा है कि वो कोई व्यवस्था बनाएं। यह बात मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने ‘नवदुनिया” के सवाल पर कही।MP: मतदाता सूची में सात लाख फर्जी नामों के आरोपों को रावत ने नकारा

रावत ने भोपाल प्रवास के दौरान चर्चा में कहा कि प्रदेश की मतदाता सूची में फर्जी मतदाताओं के नाम नहीं है। मृत, अनुपस्थित और स्थानांतरित मतदाताओं का खुलासा हमनें ही किया है। नियम कहता है कि एक मतदाता का नाम दो जगह नहीं होना चाहिए। ऐसे नाम पाया जाना अपराध है पर हमारे यहां लोकतंत्र है। हम नोटिस देकर जवाब लेते हैं फिर नाम एक जगह से हटाते हैं। नाम जोड़ना और हटाना सतत चलने वाली प्रक्रिया है।

एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसके लिए पहले संविधान में संशोधन होगा और नियमों में बदलाव होंगे। इसके बाद चुनाव आयोग की भूमिका आएगी। जब ऐसी स्थिति होगी तो हम भी तैयार होंगे। वीवीपैट को लेकर उठने वाले सवालों को लेकर उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भी इसको लेकर पहले बहुत चिंता थी। हर विधानसभा क्षेत्र में जब इसकी प्रक्रिया बताई गई तो इसे स्वीकार किया गया।

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