MLA कुलदीप सेंगर पर आरोपों से उठे सवाल, क्या मायावती जैसा दम दिखाएंगे CM योगी?

उत्तर प्रदेश के उन्नाव के बांगरमऊ से बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर पर लगा बलात्कार का आरोप और पीड़िता के पिता की जेल में संदिग्ध हालात में हुई मौत से योगी सरकार पर सवाल खड़े होने लगे हैं. सपा, बसपा और कांग्रेस सहित विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सूबे की सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. सरकार के साथ-साथ पार्टी के लिए भी सेंगर से जुड़ा ये विवाद मुश्किलें बढ़ाने वाला है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार और पार्टी की छवि बचाने के लिए कोई ऐसा सख्त कदम उठाएंगे जैसा यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने कार्यकाल में उठाया था.MLA कुलदीप सेंगर पर आरोपों से उठे सवाल, क्या मायावती जैसा दम दिखाएंगे CM योगी?योगी सरकार एनकाउंटर के जरिए क्राइम कंट्रोल करने में जमकर वाहवाही लूट रही है लेकिन रसूखदारों के द्वारा किए गए क्राइम पर उसका रवैया अभी तक उल्टा ही है. सरकार तमाम रसूखदारों पर दंगों जैसे मामलों में केस वापस लेने की कवायद में जुटी है. अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष और आगरा से बीजेपी सांसद रामशंकर कठेरिया पर लगे 13 केस भी वापस लिए जा रहे हैं. इसके अलावा वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ भी सालों से चल रहा रेप का केस वापस लेने की तैयारी है.

हालांकि कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में उनके भाई को गिरफ्तार किया गया है लेकिन उसे भी पीड़िता के पिता से मारपीट के मामले में उठाया गया है जबकि पीड़िता विधायक और उनके भाई पर गैंगरेप का आरोप लगा रही है. उधर, निर्दलीय विधायक अमनमणि पर भी जमीन कब्जा करने का आरोप है लेकिन योगी से मिलने आए शिकायतकर्ता को डांटकर भगा दिया गया.

बता दें कि 2007 में बसपा की सरकार बने कुछ ही दिन गुजरे थे. बसपा के तत्कालीन सांसद उमाकांत यादव पर जमीन कब्जे का आरोप था. मायावती ने सांसद को बुलाया और अपने ही आवास से पुलिस के हवाले कर दिया. मायावती के इस कदम से हर कोई हैरान रह गया था और उससे पुलिस और प्रशासन को भी सख्त संदेश गया था कि रसूखदारों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी भले ही वो सत्तारूढ़ पार्टी से ही क्यों न जुड़े हों. सिर्फ उमाकांत यादव ही नहीं, मायावती ने अपने शासनकाल में बांदा जिले से बसपा के तत्कालीन विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी को बलात्कार के मामले में गिरफ्तार करवाकर जेल भेजा था.

द्विवेदी पर भी बीजेपी विधायक सेंगर की ही तरह बांदा की एक लड़की ने बलात्कार का आरोप लगाया था. इस मामले को बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया था. इसी तरह मायावती की सरकार में फैजाबाद से विधायक आनंद सेन यादव मंत्री थे. उनपर भी एक लड़की के अपहरण और हत्या का आरोप लगा. बसपा सुप्रीमो ने आनंद सेन को कैबिनेट से बर्खास्त कर जेल भेज दिया. हालांकि बाद में कोर्ट से आनंद सेन बरी कर दिए गए. बसपा सरकार के दौरान ही भगवान शर्मा उर्फू गुडडू पंडित, योगेंद्र सागर, अवध पाल सिंह यादव समेत कई विधायकों पर छेड़छाड़ और बलात्कार के गंभीर आरोप लगे थे. बसपा सरकार में मंत्री रहे दद्दू प्रसाद पर भी एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए थे. ये सभी पार्टी से निकाल दिए गए या खुद पार्टी छोड़कर चले गए. 

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति पर भी बांदा की एक महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया था. हालांकि मायावती जैसी सख्ती अखिलेश नहीं दिखा सके. पीड़ित महिला ने कोर्ट की शरण ली और अदालत के हस्तक्षेप के बाद गायत्री प्रजापति के खिलाफ शिकंजा कसा लेकिन इसके बावजूद गायत्री प्रजापति को योगी सरकार आने के बाद ही गिरफ्तार किया जा सका. वे खुलेआम अखिलेश यादव के साथ मंच शेयर करते रहे.

अखिलेश सरकार बनने के एक साल के बाद 2013 में सपा के तत्कालीन विधायक महेंद्र सिंह उर्फ झीन बाबू गोवा में बार डांसर के साथ गिरफ्तार हुए थे. विपक्ष के सवाल उठाए जाने के बाद सपा ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. इसके अलावा सपा के विधायक रहे अमनमणि पर भी पत्नी की हत्या के मामले ने पार्टी की जमकर किरकिरी कराई थी. सपा सरकार में बिजनौर के नगीना क्षेत्र के विधायक मनोज पारस भी ऐसे ही आरोपियों की फेहरिश्त में हैं जिन्हें अपना मंत्री पद गंवाना पड़ा था.

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