उत्तराखंड में पौधों को किया गया क्वारंटीन, मामला जानकर सभी हैरान…

विदेश से आयात होने वाले बेशकीमती और उन्नत प्रजाति के पौधों को उत्तराखंड में भी क्वारंटीन किया जाएगा। केंद्र सरकार ने टिहरी में पोस्ट एंट्री क्वारंटाइन सेंटर (पीईक्यूसी) के निर्माण की सैद्धांतिक सहमति देते हुए राज्य को नोडल अफसर नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय बीज निगम इसके लिए टिहरी में धनोल्टी और मगरा में जमीन भी चिन्हित कर चुका है। उत्तर भारत में उत्तराखंड के साथ ही पीईक्यूसी जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बनाया जाना है। कृषि एवं उद्यान सचिव हरबंस चुघ ने बताया कि केंद्र के निर्देश पर संयुक्त निदेशक डॉ. रतन कुमार को इस प्रोजेक्ट के लिए नोडल अफसर नियुक्त कर दिया गया है। इस केंद्र के स्थापित होने से कम से कम 100 करोड़ रुपये का निवेश उत्तराखंड में होने की उम्मीद है।

इसलिए है जरूरी: विदेशों से लाए जाने वाले पौधों के साथ कई बार स्थानीय बीमारियां और खरपतवार भी आ जाते हैं। इसलिए देश में इनका उपयोग-उत्पादन शुरू करने से पहले बीमारी आदि सभी घातक आशंकाओं को खत्म करना जरूरी है। पीईक्यूसी में एक तय अवधि तक इन पौधों को रखा जाता है और उनका उपचार भी किया जाता है। यह ठीक उसी प्रकार है जैसे कि वायरस की चेन तोड़ने के लिए लोगों को एक दूसरे के संपर्क में आने से रोका जाता है।

राज्य को फायदा: पीईक्यूसी की स्थापना से राज्य को एक राष्ट्रीय स्तर का केंद्र तो मिलेगा ही, साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता के पौधे व अन्य सामग्री स्थानीय लोगों को स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगे। नेशनल बागवानी बोर्ड और नेशनल सीड कारपोरेशन मिलकर इसे तैयार कर रहे हैं।

उत्तराखंड का प्राकृतिक माहौल पीईक्यूसी के अनुकूल है। इसका राज्य को काफी लाभ मिलेगा। इस प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र सरकार के साथ बातचीत लगातार जारी है। भूमि को चिह्नित किया जा चुका है।

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