सरायशेख चिनहट के प्राथमिक विद्यालय का प्रांगण बना तालाब

प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में है गांव का तालाब, बच्चो में फैल सकता है संचारी रोग

  • प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में है गांव का तालाब, बच्चो में फैल सकता है संचारी रोग
  • प्राथमिक विद्यालय का तथाकथित ‘‘स्विमिंग पूल‘‘ बना बच्चों की जान के लिए खतरा

लखनऊ. प्रदेश सरकार यूपी में संचारी रोग तथा पानी जनित बीमारियों को रोकने में लगी हुए है तथा अपने स्तर पर बीमारी पर काबू करने के लिए हर संभव जरूरी कोशिश भी कर रही है, लेकिन प्रदेश सरकार के कुछ अफसर उनकी इस मंशा में पलीता लगाने में लगे हैं। यह बात यूपी की राजधानी लखनऊ के चिनहट के सतरिख रोड के सरायशेख गांव मे स्थित प्राथमिक विद्यालय स्थिति को देखने से स्पष्ट होता है। जिसके प्रांगण के बीच में एक तालाब है जो विद्यालय को दो हिस्सों मे बाट रहा है।

प्राथमिक विद्यालय के तालाब में पूरे गांव के घरों, नाली का पानी बह कर आता है। इसके आलावा गांव में कई जानवर भैंस, गाय आदि का गोबर भी बह कर उस पानी में आता है। जिसके कारण तालाब का पानी दिन प्रतिदिन बढता एवं प्रदूषित होता जा रहा है। पानी आस-पास के भूमिगत जल को भी दूषित कर रहा है।
तालाब के गंन्दे पानी से तालाब के आस-पास खर पतवार जमा होने के कारण कई जहरीले जानवर भी वहां पर रहते है जो कभी भी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चांें को हानि पहुंचा सकते हैं। तालाब होने की वजह उसमें कई जहरीले जानवर साप बिच्छु आदि भी घूमते रहते हैं।

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विड़म्बना यह है कि पिछले एक साल से यह क्षेत्र लखनऊ नगर निगम का हिस्सा है। इसके बावजूद गांव के पानी के निकास की कोई उचित व्यवस्था नहीं बन पा रही है। तालाब के पानी की निकासी ना होने के कारण पानी का स्तर बढता जा रहा है। इस प्रकरण मेें तीनों विभाग ग्रांम पंचायत, बेसिक शिक्षा विभाग तथा नगर निगम के जिम्मेदार कोई ध्यान नहीं दे रहे। वर्तमान समय में तीनों विभाग किसी बडी़ दुर्घटना के इंतजार में बैठे है।


कुछ समय पहले ही प्रदेश सरकार ने स्वच्छता के प्रति लापरवाह लोगों के खिलाफ आर्थिक दंड व कारावास का प्रविधान किया गया था तथा प्राथमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे विद्यालयों के आसपास व विद्यालय परिसर में दवाओं का छिड़काव कराकर गंदगीमुक्त करायें। पंचायतीराज व स्वास्थ्य विभाग को बच्चों को पीने लायक स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने सहित विस्तृत दिशानिर्देश दिए थे।

प्राथमिक विद्यालय के तालाब की स्थिति को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि उक्त निर्देश कागजों में तो बहुत ही तेजी से चल रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर यह कार्य ना के बराबर हो रहा है।
हास्यपद स्थिति तो ये प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक गांव में डोर टू डोर भ्रमण कर प्रत्येक घर में दस्तक देकर ग्रामीणों को संचारी रोग के बचाव के प्रति जागरूक कर रहे हैं तथा ग्रामीणों से अपील की जा रही है कि घर के आसपास पानी का जमाव न होने दें। घर में साफ-सफाई रखे। जबकि उनके विद्यालय स्थित तालाब तथा आस-पास गंदगी को नहीं खत्म करा पा रहे हैं।

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