अखिलेश और शिवपाल के बीच नहीं बन रही है राजनितिक बात, बीच में फंसे चाचा

समाजवादी पार्टी का परिवारिक तनाव एक बार फिर से सामने आ गया है. लाख कोशिशों के बावजूद मुलायम सिंह के छोटे भाई शिवपाल यादव के भतीजे अखिलेश यादव के साथ बात नहीं बन रही है. लिहाजा शिवपाल को पार्टी में दोबारा “सम्माननीय स्थान” नहीं मिल सका है. दो साल पहले चाचा और भतीजे के बीच आखिरी दौर की लड़ाई हुई थी. उस वक्त अखिलेश ने चाचा शिवपाल को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया था. इसके अलावा अखिलेश ने अपने पिता मुलायम सिंह को भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटा दिया था.

शिवपाल तब से लेकर अब तक अकले हैं. वो पिछले महीने लखनऊ में आयोजित पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मौजूद नहीं थे. परिवार के कुछ लोगों ने मामले को सुलझाने की भी कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी. शिवपाल ने साल की शुरुआत में हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी का साथ देकर भतीजे अखिलेश के नजदीक पहुंचने की कोशिश भी की. इसके अलावा उन्होंने मुलायम के चचेरे भाई और अखिलेश के वफादार राम गोपाल यादव के साथ दो बैठकें भी की हैं.

शिवपाल के कैंप में बेचैनी बढ़ती जा रही है. दरअसल 2019 के आम चुनाव से पहले पार्टी बीएसपी और कांग्रेस के साथ महागठबंधन करने की तैयारियों में है लेकिन शिवपाल को इससे जुड़ी बातचीत से बिल्कुल अलग रखा गया है. पूर्व मुख्यमंत्री और मुलायम के बेटे ने संकेत दिए हैं कि उत्तर प्रदेश में कन्नौज से वो लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे न कि उनकी पत्नी डिंपल. लोकसभा में समाजवादी पार्टी के 7 एमपी है और इसमें से 5 तो उनके परिवार से ही ताल्लुक रखते हैं. इसमें मुलायम सिंह यादव, भतीजे धर्मेंद्र, अक्षय, तेज प्रताप और बहू डिंपल यादव शामिल हैं.

समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगता रहा है. ऐसे में अखिलेश यादव अपनी पार्टी का इमेज ठीक करना चाहते हैं. इसका नुकसान शिवपाल और उनके बेटे आदित्य को उठाना पड़ सकता है. दरअसल लोकसभा में चुने जाने के बाद ये दोनों अपना बेस दिल्ली में बनाना चाहते हैं. शिवपाल के बेटे आदित्य अभी तक चुनावी मैदान में नहीं उतरे हैं. वो फिलहाल स्टेट कॉरपोरेटिव फेडरेशन के चयरमैन हैं. लोकसभा चुनाव में शिवपाल के बेटे को टिकट उनके लिए वापसी का पैकेज हो सकता है.

शिवपाल समाजवादी पार्टी में अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं. पिछले कुछ महीनों से वो शनिवार और रविवार को दिल्ली में लगातार डेरा डाल रहे हैं. यहां उन्होंने अपने राजनीतिक सहयोगियों और लीगल एक्सपर्ट से मुलाकात की है. शिवपाल धर्मनिरपेक्ष मोर्चे के साथ बातचीत कर रहे हैं. इसके अलावा वो चरन सिंह के लोक दल जैसे पुराने पंजीकृत राजनीतिक पार्टी को पुनर्जीवित करने पर भी विचार कर रहे हैं.

इस महीने की शुरुआत में योगी आदित्यनाथ के साथ भी उनकी मुलाकात हुई थी. हलांकि उन्होंने कहा था कि राज्य में खराब कानून और व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा करने के लिए वो योगी आदित्यनाथ के पास गए थे. शिवपाल ने भाई मुलायम के साथ ‘धर्मनिरपेक्ष’ की राजनीति की है. ऐसे में उनके लिए बीजेपी के साथ सीधे तौर पर हाथ मिलाना भी आसान नहीं होगा. शिवपाल के लिए काफी कम विकल्प बच गए हैं.

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