उत्तराखण्ड में राजनीतिक दलों ने निकाय चुनावों की बिछाई बिसात

देहरादून: भले ही निकाय चुनावों मे अभी एक माह से अधिक का समय शेष है लेकिन राजनीति दलों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। भाजपा व कांग्रेस के बाद अब बसपा, सपा व उक्रांद भी जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश में जुट गए हैं। उत्तराखण्ड में राजनीतिक दलों ने निकाय चुनावों की बिछाई बिसात

 उत्तराखंड के 92 निकायों का कार्यकाल अगले माह चार मई को समाप्त हो रहा है। अब 86 निकायों में चुनाव होने हैं। पहले यह चुनाव चार मई से पहले होने की उम्मीद थी लेकिन निकायों के परिसीमन को लेकर चली अदालती लड़ाई के चलते अब यह थोड़ा पीछे सरक गए है। अब एक माह बाद निकाय चुनाव की आचार संहिता लगने की संभावना है। इन्हें वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। 

इन चुनावों में जो भी पार्टी बढ़त बनाएगी उसे लोकसभा चुनावों में मनोवैज्ञानिक बढ़त भी मिलेगी। इसे देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल इन चुनावों की तैयारियां में जोर शोर से जुट गए हैं। भाजपा के उपर विधानसभा चुनावों में किए गए शानदार प्रदर्शन को दोहराने का दबाव है। इसके लिए पार्टी ने बकायदा दावेदारों से रायशुमारी करने के साथ ही पार्टी स्तर पर इनका सर्वे भी करा लिया है। 

दावेदारों से आवेदन लिए जा रहे हैं। इनका इतिहास भी खंगाला जा रहा है। पार्टी की मंशा ऐसे प्रत्याशियों को टिकट देने की है जो जीत सकें। वहीं कांग्रेस विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद अब कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकने की तैयारी कर रही है। पार्टी ऐसे प्रत्याशियों को तलाश कर रही है जो जीत का आधार बनें। इसके लिए बकायदा जिलेवार पर्यवेक्षकों की तैनाती कर दावेदारों से आवेदन लिए जा रहे हैं। बसपा, सपा व उक्रांद में इस तरह की प्रक्रिया तो नहीं चल रही है लेकिन ये सभी दल मजबूत प्रत्याशियों की तलाश कर रहे हैं। 

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