किसान आंदोलन को लेकर पीएम मोदी ने कही ऐसी बात, किसानों में मच गया हड़कंप

पीएम मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फिक्की की 93वीं वार्षिक आम बैठक का उद्घाटन किया। इस मौके पर फिक्की में मौजूद उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज अर्थव्यवस्था के सूचक उत्साह बढ़ाने वाले हैं। देश ने संकट के समय जो सीखा उसने भविष्य के संकल्पों को और दृढ़ किया है।

विश्व का जो विश्वास बीते छह वर्षों में भारत पर बना था, वो बीते महीनों में और मजबूत हुआ है। विदेशी निवेशकों ने भारत में रिकॉर्ड निवेश किया है और निरंतर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से 4 लाख करोड़ रुपये का ट्रांस्सेक्शन हो रहा है। छोटे छोटे डिजीटल पेमेंट भी संभव हो रहे हैं। उद्योग जगत के लोग देश की इस ताकत को समझते हुए आगे बढ़ें।

पीएम मोदी ने कहा कि ग्रामीण भारत बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। गांव में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या शहरों से अधिक हुई है। आधे से ज्यादा स्टार्ट अप टीयर टू और थ्री शहरों में है। गांव के लोग बाजार, स्कूल, अस्पताल से तेजी से जुड़ रहे हैं। ग्रामीण लोगों की आकांक्षाएं बढ़ रही है। सरकार पूरी तरह से इन्हीं आकांक्षाओं की पूर्ती करने में जुटे हैं।

उन्होंने उद्योग जगत का आहवान करते हुए कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी के प्रयासों में सरकार के भागीदार बनें। 21वीं सदी में गांव और छोटे शहर ही संभावनाएं बढ़ेंगी। उद्योग जगत को गांव और छोटे शहरों में इन्वेस्टमेंट का मौका नहीं गंवाना चाहिए। संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे।

कृषि क्षेत्र पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र पहले से अधिक प्रगतिशील हुआ है। भारत के किसानों के पास मंडियों के बाहर भी बेचने का विकल्प है। मंडियों का आधुनिकीकरण हो रहा है। किसानों को डिजीटल प्लेटफार्म पर खरीदने और बेचने का विकल्प मिला है। जब देश का किसान समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा। पहले ऐसी स्थिति नहीं थी।

उन्होंने कहा कि जितना हमारे देश में कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र में निवेश होना चाहिए उतना नहीं हुआ। हमारे यहां कोल्ड स्टोरेज की कमी रही, खाद की किल्लत होती थी, कृषि क्षेत्र में कई चुनौतियों के लिए केन्द्र सरकार काम कर रही है लेकिन इसमें उद्योग जगत की रुचि की जरूरत है।

फसल उगाने वाले किसानों को जितना आधुनिक तकनीक का सहारा मिलेगा, व्यापार को उतना सहयोग मिलेगा। उद्योग जगत जितना निवेश करेंगे उतनी किसानों की आय बढ़ेगी। एग्रो इंडस्ट्री के लिए बहुत संभावनाएं हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था विकसित करने के लिए अनुकूल भी है। किसानों के हित में व सेवा क्षेत्र, सामाजिक क्षेत्रों के बीच फिक्की जैसे संगठन ब्रिज का काम कर सकते हैं। राष्ट्र निर्माण की भूमिका को और व्यापक बनाना है। लोकल के लिए वोकल के मंत्र को साकार करना है।

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