दिल्ली से पीएम मोदी ने दिया सख्त संदेश: नहीं बचेंगे बेटियों के गुनहगार, मिलेगी सख्त सजा

नई दिल्ली। उन्नाव और कठुआ की घटनाओं को लेकर उग्र देश और गर्म राजनीतिक माहौल के बीच खुद प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया है कि कोई भी अपराधी नहीं बचेगा, न्याय होगा और पूरा होगा। उन्होंने हर किसी से अपील की इस बुराई को खत्म करने के लिए संगठित हों।दिल्ली से पीएम मोदी ने दिया सख्त संदेश: नहीं बचेंगे बेटियों के गुनहगार, मिलेगी सख्त सजा

कोई भी दोषी नहीं बचेगा

यूं तो उन्नाव और कठुआ में हुई दुष्कर्म की घटनाओं पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है लेकिन पिछले दिनों में यह राजनीतिक रंग भी ले चुका है। सीबीआई ने काम शुरू कर दिया लेकिन एक दिन पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इंडिया गेट पर कैंडल प्रदर्शन भी किया था। उन्नाव में आरोपी भाजपा विधायक और कठुआ में कुछ हिंदू संगठनों के खिलाफ कार्रवाई में सुस्ती का आरोप भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने सख्त लहजे में ऐसी घटनाओं की निंदा की तो भरोसा भी दिलाया कि कोई भी दोषी नहीं बचेगा।

हम सब शर्मसार हैं

पीएम न कहा- देश के किसी भी राज्य में, किसी भी क्षेत्र में होने वाली ऐसी वारदातें हमारी मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देती हैं, ऐसी घटनाएं सामाजिक न्याय की अवधारणा को चुनौती देती हैं। एक समाज के रूप में, एक देश के रूप में हम सब इसके लिए शर्मसार हैं। लेकिन दोषी बच नहीं पाएगा।

कांग्रेस दलितों को न्याय नहीं देना चाहती

बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती से ठीक पहले उनकी याद में बनाए गए स्मारक का उद्घाटन करने के दौरान पीएम ने अपने संबोधन में अंबेडकर के कई उद्धरण पेश किए और कहा कि अंबेडकर का कांग्रेस से मोह भी तभी भंग हुआ था जब उन्होंने यह समझ लिया कि कांग्रेस दलितों को न्याय नहीं देना चाहती। पहले तो खुद अंबेडकर को चुनावों में हराने में कांग्रेस का हाथ रहा और बाद में आरक्षण व्यवस्था लागू करने के लिए आयोग का गठन भी नहीं किया गया। मंत्री रहते हुए भी अंबेडकर को नेहरू काल में किसी दूसरी अहम समिति में नहीं रखा गया।

अंबेडकर को अपमानित किया गया

पीएम ने कहा कि सच्चाई यह है कि कांग्रेस काल में जिंदा रहते हुए भी अंबेडकर को अपमानित किया गया और उनके देहांत के बाद भी नजरअंदाज किया गया। प्रधानमंत्री ने एक एक कर गिनाया कि अंबेडकर से जुड़ी यादों को तभी संजोया गया जब भाजपा की सरकारें रहीं। अंबेडकर स्मारक पर भी तभी विचार शुरू हुआ था जब केंद्र में वाजपेयी सरकार थी। लेकिन उसके बाद से उस पर चुप्पी रही। फैसला तब हुआ जब केंद्र में मोदी सरकार आई। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मैं खुद गरीब परिवार से आता हूं, जातिवादी सूचक संबोधनों को भी झेल चुका हूं और इसलिए महसूस कर सकते हैं कि अंबेडकर के साथ क्या हुआ होगा। कांग्रेस के लिए यह अहसास से परे है।’

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