PM मोदी ने कहा-लौटेगी काशी की रौनक, बड़े एक्सपोर्ट हब बनाने का रखा लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र काशी में कोरोना लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की मदद करने वाले लोगों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों से संवाद किया. पीएम ने कहा कि मां अन्नपूर्णा और बाबा विश्वनाथ के दूत बनकर काशी के लोग हर जरूरतमंद तक पहुंचे. इस दौरान पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के मॉडल के तौर पर काशी को देश का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की बात कही.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वाराणसी के कुछ गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के प्रतिनिधियों से बात करते हुए कहा कि ये भगवान शंकर का ही आशीर्वाद है कि कोरोना के इस संकट काल में भी हमारी काशी उम्मीद और उत्साह से भरी हुई है. पीएम ने भोजपुरी से संबोधन की शुरूआत करते हुए कहा, ‘हर-हर महादेव. काशी के पुण्य धरती के आप सब पुण्यात्मा लोगन के प्रणाम हौ.’

पीएम मोदी ने कहा कि हम सभी के प्रयासों से हमारी काशी भारत के एक बड़े एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित हो सकती है और हमें करना चाहिए. काशी को हम आत्मनिर्भर भारत अभियान के प्रेरक के रूप में भी विकसित और उसे स्थापित करें. उन्होंने कहा कि इस समय काशी में ही लगभग 8 हजार करोड़ रुपये के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है. देश में जब स्थितियां सामान्य होंगी तो काशी में पुरानी रौनक भी उतनी ही तेजी से लौटेगी. इसके लिए हमें अभी से तैयारी करनी होगी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें काशी को एक्सपोर्ट हब बनाना है. आत्मनिर्भर योजना के जरिये ज्यादा से ज्यादा कार्यों को बढ़ावा देना है. अभी से इसकी तैयारी भी हमें करनी है. टूरिज्म से जुड़े प्रोजेक्ट क्रूज, लाइट एंड साउंड, दशाश्वमेध घाट, घाटों का सौंदर्यीकरण पर तेजी से काम हो रहा है. काशी को देश में आत्मनिर्भर का बड़ा केंद्र बनना है. सरकार के फैसले के बाद यहां की साड़ियां, डेयरी और मछली पालन में अपार संभावनाएं सामने आ रही हैं. इन सभी प्रयासों से काशी को भारत में बड़े एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा सकता है, जो देश में आत्मनिर्भर भारत का प्रेरक बन सके.

मोदी ने कहा कि जन-धन खाते में हजारों करोड़ रुपये जमा कराना हो या फिर गरीबों, श्रमिकों के रोजगार की चिंता, छोटे उद्योगों को, रेहड़ी-ठेला लगाने वालों को, आसान ऋण उपलब्ध कराना हो या खेती, पशुपालन, मछलीपालन और दूसरे कामों के लिए कई ऐतिहासिक फैसले किए गए हैं. पीएम ने कहा इसी भावना के साथ केंद्र सरकार ने भी निरंतर प्रयास किया है कि कोरोना के इस समय में सामान्य जन की पीड़ा को साझा किया जाए, उसको कम किया जाए. गरीब को राशन मिले, उसके पास कुछ रुपए रहें, उसके पास रोजगार हो और वो अपने काम के लिए ऋण ले सके, इन सभी बातों पर ध्यान दिया है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक बात हमें बार-बार करनी है, हर किसी से करनी है, खुद से भी करनी है. हम सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति चाहते हैं. रास्तों पर थूंकने की हमें आदत बदलनी पड़ेगी और दो गज की दूरी, गमछा या फेस मास्क और हाथ धोने की आदत को हमें अपना संस्कार बनाना होगा. पीएम ने कहा कि कितनी भी बड़ी आपदा क्यों न हो, कोई काशी के लोगों की जीवटता का मुकाबला नहीं कर सकता. जो शहर दुनिया को गति देता हो, उसके सामने कोरोना क्या चीज है. अलग-अलग क्षेत्र की विभूतियों ने परंपरा को जिंदा किया है.

कोरोना संकट के चलते सावन में दर्शन नहीं कर पाने का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ये सही है कि लोग बाबा विश्वनाथ धाम नहीं जा पा रहे, ये सही है कि मानस मंदिर, दुर्गाकुंड, संकटमोचन में सावन का मेला नहीं लग पा रहा है. लेकिन ये भी सही है कि इस अभूतपूर्व संकट के समय मैं और मेरी काशी, हमारी काशी ने, इस अभूतपूर्व संकट का डटकर मुकाबला किया है.

उन्होंने कहा कि कम समय में फूड हेल्पलाइन और कम्यूनिटी किचन का व्यापक नेटवर्क तैयार करना, हेल्पलाइन विकसित करना, डेटा साइंस की मदद लेना, वाराणसी स्मार्ट सिटी के कंट्रोल एंड कमांड सेंटर का भरपूर इस्तेमाल करना यानी हर स्तर पर सभी ने गरीबों की मदद के लिए पूरी क्षमता से काम किया.

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