5% वोटों की चाहत में पटेल के लिए उमड़ा प्यार,ये हैं मायने
लखनऊ.सरदार पटेल की जयंती के मौके पर राजनीतिक दलों ने उन्हें खूब याद किया। बीजेपी ने जहां रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया, वहीं सपा और कांग्रेस ने भी अपने प्रदेश कार्यालय में बड़े नेताओं की मौजूदगी में सरदार पटेल को याद किया। जानकारों की मानें तो नगर निकाय चुनाव सामने है। साथ ही एक साल बाद 2019 का लोकसभा चुनाव भी आने वाला है। ऐसे में राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से यूपी के 5 फीसदी कुर्मी वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए लगे हुए हैं। 
यूपी की 32 विधानसभा और 8 लोकसभा सीटों पर है प्रभाव…
-कुर्मियों का यूपी की 32 विधानसभा और 8 लोकसभा सीटों पर प्रभाव है। जहां किसी भी चुनाव में कुर्मी निर्णायक साबित होते हैं।
-पूर्वांचल में लगभग 16 जिले ऐसे हैं, जहां 8 से 12 फीसदी कुर्मी हैं और निर्णायक स्थिति में हैं।
-कुर्मियों की संख्या देखें तो पूरे यूपी में लगभग 75 में से 23 जिले कुर्मी बाहुल्य माने जाते हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्र में कुर्मी कई वर्गों में बंटे हुए भी हैं। जैसे कहीं वर्मा हैं, कहीं सिंह तो कहीं पटेल हैं।
गुजरात से गलत मैसेज ना निकले, इसलिए कर रही रन फॉर यूनिटी
-जानकारों का मानना है कि सरदार पहले पटेल हैं फिर कुर्मी और गुजरात में यह पटेल बीजेपी की नाक में दम किए हुए हैं।
-हार्दिक पटेल के नेतृत्व में वहां बीजेपी का खेल बिगाड़ने की कोशिश है। ऐसे में बीजेपी उन्हें मैसेज देना चाहती है कि हम तो आपको सिर आंखों पर बिठाएं हैं, आप हमारा सपोर्ट करें।
-इन्हीं कुर्मी वोटों की खातिर बीजेपी ने 2014 चुनाव से पहले कुर्मी नेता अनुप्रिया पटेल को अपनी कैबिनेट में भी शामिल किया था।
सपा को डर है कहीं खिसक न जाए वोट बैंक
-वहीं, जानकारों का कहना है कि पहली बार समाजवादी पार्टी ने इतने बड़े स्तर पर सरदार पटेल की जयंती अपने कार्यालय में मनाई है।
-2012 में समाजवादी पार्टी को 35 फीसदी वोट कुर्मियों के मिले थे, लेकिन 2017 विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने इसमें सेंध लगा दी और बहुमत की सरकार बनाई। अब समाजवादी पार्टी इसको दोबारा अपने खेमे में लाना चाहती है।
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कांग्रेस भी खोई जमीन तलाश रही है
-वहीं, सरदार पटेल के बहाने कांग्रेस भी कुर्मी समाज में अपनी खोई जमीन तलाश रही है। पूर्वांचल में कुर्मियों के नेता कांग्रेस के आरपीएन सिंह माने जाते हैं। बहरहाल, 2012 में कांग्रेस को सिर्फ 13% वोट मिले थे।
-चूंकि गुजरात में हार्दिक पटेल और राहुल गांधी की दोस्ती की सम्भावना बन रही है। ऐसे में गुजरात में पटेलों के मुद्दों को यूपी में भुनाना चाहती है।





