बच्चों के सर से माता-पिता का उठा साया, तो पड़ोसी बने जीवन का सहारा

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जबलपुर। इस महंगाई के जमाने में हम कहते हैं कि हम दो, हमारे दो ही अच्छे। परिवार के आगे देखने में मुश्किल होती है। लेकिन जबलपुर जिले के मझौली के साहू दंपती कुछ अलग हैं। उन्होंने न सिर्फ अपने चार बधाों का अच्छे से लालन-पालन किया बल्कि जब पड़ोस के तीन बधो अनाथ हुए तो उनके भी सहारा बन गए।बच्चों के सर से माता-पिता का उठा साया, तो पड़ोसी बने जीवन का सहारा

मझौली के ताम्रकार मोहल्ले में अनिल नामदेव और सुमन रहते थे। उनके एक बेटा व दो बेटियां थीं। पांच साल पहले बीमारी के चलते अनिल की मौत हो गई। डेढ़ साल बाद सुमन ने भेड़ाघाट के परछिया गांव में एक युवक से दूसरी शादी कर ली। उसे लगा कि अब बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा लेकिन डेढ़ साल में ही वह घरेलू झगड़ों से इतनी प्रताड़ित हो गई कि सुमन ने आत्महत्या कर ली।

कुछ दिन नितिन सौतेले पिता के साथ रहा लेकिन रोज-रोज की चिक-चिक से परेशान होकर दो साल पहले मझौली में अपने पुराने घर में आ गया। यहां उनके पड़ोसी सुनील साहू और उनकी पत्नी पप्पी साहू ने उसे आसरा दे दिया।

सौतेला पिता बेचना चाहता था बेटियों को-

नितिन पहले ही अपने सौतेले पिता के व्यवहार से प्रताड़ित होकर घर छोड़कर साहू दंपती के पास आ गया था। एक साल पहले उसके दोस्त के पास उसकी दोनों बहनों निधि (13) व नेहा (12) की टीचर का फोन आया कि सौतेला पिता दोनों को प्रताड़ित करता है। बच्चियों को डर है कि कहीं सौतेला पिता उन्हें बेच न दे। नितिन ने यह बात जब पप्पी साहू को बताई तो पहले मझौली थाने में इसका आवेदन दिया और भेड़ाघाट के परछिया गांव जाकर दोनों बधिायों को अपने साथ ले आईं। मझौली के स्कूल में ही दोनों का एडमिशन करा दिया। पिछले एक साल से वे तीनों बच्चों की परवरिश कर रही हैं।

4 बच्चों की दी बेहतर शिक्षा-

पप्पी साहू के पहले से 4 बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी 23 वर्षीय पूजा ने एमटेक किया है और अब जॉब कर रही हैं। 19 वर्षीय बेटा शशांक साहू रीवा से इंजीनियरिंग कर रहा है। 17 वर्षीय पीयूष भोपाल से बीएससी और 23 वर्षीय शिवांगी कटंगी से बीएड कर रही है। उनके चारों बच्चे बाहर हैं। घर में पप्पी व उनके पति सुनील इन तीन बच्चों के साथ रहते हैं।

बच्चों को गोद लेने दिया आवेदन-

बच्चों को अधिकारिक रूप से गोद लेने के लिए सुनील और पप्पी ने एक साल पहले महिला एवं बाल विकास विभाग में आवेदन भी कर दिया है। वहां से उनके आवेदन को बाल कल्याण समिति को अग्रेषित भी कर दिया गया है। अभी उस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। सुनील साहू सहकारी समिति में कर्मचारी हैं। उनका वेतन बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए तीन बच्चों का अच्छे से लालन-पालन करने के लिए आर्थिक सहायता की भी मांग की है।

तीनों बच्चों को गोद लेने का आवेदन साहू दंपती द्वारा दिया गया था। वो अभी प्रक्रिया में है। उम्मीद है कि बच्चों के बेहतर भविष्य के मद्देनजर पप्पी साहू के पक्ष में निर्णय आएगा।

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