बिपिन रावत के इस बयान पर बौखलाया पाकिस्तान, कहा- अपने नेताओं की तरह ना करें बर्ताव

बिपिन रावत ने शुक्रवार को चीन और पाकिस्तान को एक साथ चेतावनी दी थी. जनरल बिपिन रावत ने पाकिस्तान को आंतकवाद का केंद्र बताया था और कहा था कि पिछले तीन दशकों से पाकिस्तानी सेना और इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस जम्मू-कश्मीर में प्रॉक्सी वॉर छेड़ते हुए आए हैं.

अब पाकिस्तान सोशल मीडिया पर एंटी-इंडिया प्रोपैगैंडा फैलाकर भारत में सांप्रादायिक हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहा है. बिपिन रावत के बयान को लेकर अब पाकिस्तान ने भड़ास निकाली है.

पाकिस्तान ने कहा है कि बिपिन रावत को पाकिस्तान विरोधी राजनीति करने के बजाय अपने प्रोफेशनल डोमेन पर फोकस रखना चाहिए. दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज में आयोजित हुए वेबिनार में बिपिन रावत ने कहा था कि तमाम आंतरिक और बाहरी चुनौतियों के बावजूद पाकिस्तान का कश्मीर पर अधूरा एंजेडा जारी है.

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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने रावत के बयान पर प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी किए बयान में कहा, हम सीडीएस बिपिन रावत के पाकिस्तान के बारे में गैर-जिम्मेदाराना और गैर-जरूरी बयान की तीखी आलोचना करते हैं. भारतीय सीडीएस का पाकिस्तान विरोधी एजेंडा पाकिस्तान के बारे में उनकी गलत समझ के साथ-साथ उनकी राजनीतिकरण करने की आदत को भी दिखाता है. 

पाकिस्तान ने कहा, जनरल रावत का बयान आरएसएस-बीजेपी की सोच से मिलता-जुलता है जो अतिवादी हिंदुत्व और विस्तारवादी अखंड भारत की नीति को बढ़ावा देती है. ये दुखद है कि ये विचारधारा भारतीय सेना समेत वहां की संस्थाओं में भी प्रवेश कर चुकी है. पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सीडीएस की बयानबाजी भारत के आंतरिक और बाहरी मोर्चे पर की गई गलतियों से ध्यान नहीं भटका सकेगी.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि हिंदुत्ववादी विचारधारा के परिणामस्वरूप भारत में नियमित तौर पर मस्जिदों में तोड़-फोड़ की जा रही है और लिंचिंग आम बात हो गई है. अल्पसंख्यकों का दमन दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. विदेश मंत्रालय ने अपने पुराने प्रोपेगैंडा के तहत आरोप लगाया कि कश्मीर में निर्दोष कश्मीरियों के खिलाफ राज्य समर्थित आतंकवाद भारत सरकार की नीति का हिस्सा बन गया है. पाकिस्तान ने जनरल रावत को सलाह दी कि वो सैन्य क्षेत्र में ही सीमित रहें और पाकिस्तान विरोधी एजेंडा चलाकर करियर बनाने की कोशिश ना करें.

सीडीएस रावत ने शुक्रवार को दिए बयान में पाकिस्तान को लताड़ लगाई थी. सीडीएस रावत ने कहा था कि मौजूदा आर्थिक संकट, फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट से बाहर निकल पाने में नाकाम होना, धार्मिक और नस्लीय हिंसा में बढ़ोतरी और सत्ता संघर्ष की वजह से भविष्य में पाकिस्तान में और अस्थिरता आएगी. जनरल रावत ने कहा था कि सोशल मीडिया पर एंटी-इंडिया एजेंडा चलाकर पाकिस्तान भारत में सामाजिक सौहार्दता खत्म करने की कोशिश कर रहा है. इससे भारत-पाकिस्तान के संबंध और खराब हुए हैं.

जनरल रावत ने कहा था कि उरी आतंकी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान को सख्त संदेश मिल गया कि अब वो परमाणु शक्ति की धमकी देकर एलएसी पर आतंकवादियों को संरक्षण नहीं दे सकता है. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सशस्त्र सेना की कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान में अस्पष्टता और अनिश्चितता का माहौल बन गया है और वहां की मीडिया रिपोर्ट्स से भी ये बात साफ होती है.

जनरल रावत ने कहा था कि अपनी आंतरिक अस्थिरता, गिरती अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने और सरकार-सेना के संबंधों में दरार के बावजूद पाकिस्तान ये कहता रहेगा कि कश्मीर उसका अधूरा एजेंडा है और उसकी सेना भारत की तरफ से खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती रहेगी ताकि वो जरूरत से ज्यादा संख्याबल और सरकार से मिलने वाले फंड का बचाव कर सके.

बिपिन रावत ने चीन के खिलाफ भी बड़ा बयान दिया था. जनरल रावत ने कहा था कि पूर्वी लद्दाख सीमा पर अभी भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. भारतीय सेना ने चीन को सीमा पर जो मुंहतोड़ जवाब दिया है, उससे उन्हें काफी चुनौती झेलनी पड़ रही हैं.

उन्होंने दो टूक कहा था कि भारत की स्थिति स्पष्ट है कि LAC पर किसी तरह का बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा. बिपिन रावत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार चीन के साथ युद्ध होने की संभावना नहीं है, लेकिन बॉर्डर पर किसी तरह की झड़प या उससे पनपे तनाव होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. हालांकि, रावत के इस बयान पर अभी तक चीन की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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