Paddy Purchased in Bilaspur: गांव में या आसपास जहां पहुंच मार्ग की सुविधा हो खरीदी केंद्रों का किया जाए गठन…

धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले अन्नदाता किसानों ने अपनी परेशानी बताना शुरू कर दिया है। गांव या पिफर आसपास के ऐसे गांव में खरीदी केंद्र स्थापित करने की मांग कर रहे हैं जहां पहुंच मार्ग की सुविधा हो और किसानों का धान सहजता के साथ खरीदी केंद्र में सुरक्षित रखा जा सके। जिले मेे करीब 30 जगहों पर नई खरीदी केंद्र खोलने की मांग उठने लगी है।

तखतपुर और बेलतरा क्षेत्र के किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड रहा है। दूरस्थ ग्रामीण इलाकों के किसानों को धान बेचने के लिए आठ से 10 किलोमीटर आना पडता है। यह दूरी तब और ज्यादा हो जाती है जब केंद्रों में भीड रहती है और उनको धान बेचे बिना ही लौटना पडता है।

तखतपुर ब्लाक के अंतर्गत आने वाले विंध्याचल, नवागां, बिनौरी, काठाकोी व पेंडारी के किसानों को धान बेचने के लिए लाखासार खरीदी केंद्र जाना पडता है। इन गांव से खरीदी केंद्र की दूरी आठ से 10 किलोमीटर के करीब है। समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले 412 किसानों ने अपनी समस्या बताते हुए किसी भी एक गांव में केंद्र की स्थापना की मांग की है।

इनका कहना है कि एक गांव में खरीदी केंद्र ब जाने से उनकी परेशानी कम हो जाएगी और बेपिफक्री के साथ धान बेच पाएंगे। किसानों ने बताया कि आसपास के गांव में खेती का रकबा 621 हेक्टेयर के करीब है। इसमें से 600 हेक्टेयर में किसान धान की खेती करते हैं। बीते 15 बरस से किसान लाखासार खरीदी केंद्र में ही धान बेचते आ रहे हैं।

इन गांव के किसान भी परेशान

अमने, मोहंदी, खैरझिटी, बरद्वार सहित आसपास के किसानों की दिक्कतें भी दूर नहीं हो रही है। यहां के किसान सेवा सहकारी समिति करगीखुर्द में धान बेचने आते हैं। खरीदी केंद्र से इन गांवों की दूसरी करीब 10 से 12 किलोमीटर की है।

82 से बढकर समिति पहुंची 116

किसानों की मांग के अनुसार राज्य शासन द्वारा खरीदी केंद्र का गठन भी किया जा रहा है। यही कारण है कि जिले में खरीदी केंद्रों की संख्या पहले 82 हुआ करती थी जो अब बढकर 116 हो गई है।

एक दिक्कत यह भी

राज्य शासन को नई खरीदी केंद्र खोलने में पूर्व में बनाए गए नियम व मापदंड भी आडे आ रही है। वर्तमान में वर्ष 2013 में जारी किया गया आदेश ही प्रभावशील है। नियमों पर गौर करें तो नए खरीदी केंद्रों की दूरी मूल केंद्र से 10 किलोमीटर होनी चाहिए। इसके अलावा ट्रकों के जरिए धान परिवहन के लिए पहुंच मार्ग की बाध्यता भी रखी गई है। एक और कडी शर्त यह कि नए खरीदी केेंद्र के लिए समिति की सहमति भी जरूरी है।

इन्होंने कहा

जिले के किसानों की ओर से लगातार मांग उठ रही है। धान बेचने के समय होने वाली दिक्कतों को देखते हुए हमने राज्य शासन से नए खरीदी केंद्र के गठन को लेकर मार्गदर्शन मांगा है।

प्रमोद नायक—अध्यक्ष,जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर

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