Home > अन्तर्राष्ट्रीय > ‘ओरायन स्पैन’ कर रहा है स्पेस में लग्जरी होटल बनाने की तैयारी, रोज़ 16 बार दिखेगा सनराइज़-सनसेट

‘ओरायन स्पैन’ कर रहा है स्पेस में लग्जरी होटल बनाने की तैयारी, रोज़ 16 बार दिखेगा सनराइज़-सनसेट

अंतरिक्ष हमेशा से ही इंसानों की उत्सुकता का विषय रहा है. स्पेस में इंसान के जाने के बाद अब आने वाले वक्त में वहां हॉलीडे मनाने का सपना भी पूरा हो सकता है. दरअसल, अमेरिकी स्टार्ट अप कंपनी ‘ओरायन स्पैन’ स्पेस में पहला लग्जरी होटल बनाने की तैयारी कर रही है. स्पेस का पहला लग्जरी होटल साल 2021 तक बनकर तैयार हो जाएगा.'ओरायन स्पैन' कर रहा है स्पेस में लग्जरी होटल बनाने की तैयारी, रोज़ 16 बार दिखेगा सनराइज़-सनसेट

यहां एक रात गुजराने का किराया 792,000 अमेरिकी डॉलर (5 करोड़ 14 लाख, 12 हजार 284 रुपया) होगा. इस होटल से रोज़ाना 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देखे जा सकेंगे. कैलिफोर्निया के ‘सैन जोस’ में आयोजित हुए ‘स्पेस 2.0 समिट’ में ‘ओरियन स्पैन’ ने इसका ऐलान किया. स्पेस में बनने वाले होटल का नाम ‘औरोरा स्टेशन’ रखा जाएगा. होटल 2021 तक तैयार हो जाएगा, लेकिन रूम की बुकिंग 2022 से हो पाएगी.

कैसा होगा होटल?

स्पेस में बनने वाले पहले होटल की लंबाई 43.5 फीट और चौड़ाई 14.01 फीट होगी. जिस जगह पर इसका प्लेटफॉर्म बनेगा, वह जगह धरती की कक्षा (Orbit) से 200 मील (321 किलोमीटर) दूर स्थित है.कितना आएगा खर्चा?
शुरुआत में इस होटल में 4 यात्रियों और 2 क्रू मेंबर्स के लिए अधिकतम 12 दिन तक ठहरने का इंतजाम किया जाएगा, जिसपर कुल 10 मिलियन डॉलर यानी करीब 61.6 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा.क्या-क्या होंगी सुविधाएं?
‘ओरायन स्पैन’ के सीईओ फ्रैंक बेंगेर के मुताबिक, इस होटल में यात्रियों को “जीरो ग्रैविटी (शून्य गुरुत्वाकर्षण) का आनंद मिलेगा. वे हाई-स्पीड वायरलेस इंटरनेट एक्सेस के जरिये पृथ्वी पर अपने परिवार से संपर्क या लाइव स्ट्रीमिंग भी कर सकेंगे.”

देख सकेंगे सूर्योदय-सूर्यास्त

‘ओरायन स्पैन’ के सीईओ फ्रैंक बेंगेर के मुताबिक, स्पेस होटल 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा करेगा. जिससे इसमें ठहरने वाले मेहमान हर 24 घंटे में करीब 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देख सकेंगे.

क्या है जीरो ग्रैविटी?

गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की वह शक्ति है, जिससे एक चीज दूसरी चीज को अपनी तरफ खींचती है. दो चीजों के बीच की दूरी जितनी कम होगी, गुरुत्वाकर्षण उतना ही ज्यादा होगा. इसके विपरीत एक-दूसरे से जितनी अधिक दूरी होगी, गुरुत्वाकर्षण बल कम होता जाएगा. इसलिए आकाश की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद गुरुत्वाकर्षण कम होता जाता है. एक वक्त के बाद यह जीरो लेवल पर आ जाता है. इसे ही ‘भारहीनता’ यानी जीरो ग्रैविटी कहते हैं. भारहीनता की स्थिति में इंसान भार महसूस नहीं करता. इसलिए अंतरिक्ष यात्री और उनके इस्तेमाल में लाई जाने वाली चीजें अंतरिक्ष में तैरने लगती हैं.

Loading...

Check Also

वियतनाम में हुए भूस्खलन की वजह से 13 लोगों की मौत, चार लापता

वियतनाम में हुए भूस्खलन की वजह से 13 लोगों की मौत, चार लापता

उष्णकटिबंधीय चक्रवातीय तूफान के बाद बारिश के कारण दक्षिण-मध्य वियतनाम में हुए भूस्खलन में कम …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com