खुला 35 साल पुराना रेप केस: अब ना आरोपी जिंदा और ना पीड़िता, जानें क्या है पूरा मामला

35 साल पहले बहला-फुसलाकर ले जाने और रेप का मुकदमा अचानक जिंदा हो गया। चौंकाने वाली बात है कि इस मामले के पीड़ित किशोरी व उसको भगा ले जाने का मुख्य आरोपित अब इस दुनिया में नहीं रहा। चार्जशीट पर स्टे के बाद आरोपित खुली हवा में घूम रहे थे। हाईकोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद तारीख पड़नी शुरू हुई है। एडीजे 11 की अदालत में 14 दिसंबर को मामले की सुनवाई है।

यह है वारदात व आरोप

परमपुरवा जूही निवासी कपड़ा दुकानदार ने मुकदमा दर्ज कराया था कि पड़ोसी नरेश उसकी 14 साल की बेटी को 18 अक्टूबर 1985 की रात बहलाकर ले गया। नरेश किशोरी को यह कहकर इलाहाबाद ले गया कि मौसी के यहां शरण लेगा। इलाहाबाद में मौसी का घर न मिल पाने पर नरेश उसके साथ इलाहाबाद स्टेशन लौट आया। यहां दोनों को पप्पू उर्फ बिंदेश्वरी मिला। पप्पू दोनों को सिर छिपाने की जगह दिलाने के बहाने अपने घर ले गया। आरोप है कि घर में पप्पू ने नरेश को शराब पिलाकर नशे में धुत कर दिया। पप्पू और उसके साथी श्रीचंद ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद दोनों को जान से मारने की धमकी देकर दूसरे स्थान ले जा रहे थे। रास्ते में पुलिस दिखने पर किशोरी ने चिल्ला दिया।

धूमनगंज पुलिस ने नरेश व पप्पू को गिरफ्तार कर लिया। श्रीचंद फरार हो गया। इधर, किशोरी के पिता ने जूही थाने में नरेश, उसके भाई रमेश, सुरेश, बहन जमुना देवी के खिलाफ 21 अक्तूबर 1985 को मुकदमा दर्ज कराया। किशोरी इलाहाबाद में बरामद हुई तो 29 अक्टूबर को उसके बयान के आधार पर जूही थाने में इलाहाबाद के पप्पू और श्रीचंद्र के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया। 25 नवंबर को पुलिस ने मुकदमे में चार्जशीट लगा दी। 22 जुलाई 1986 को जमानत पर छूटा पप्पू चार्जशीट पर हाईकोर्ट से स्टे ले आया। स्टे के चलते स्थानीय अदालत में सुनवाई पर रोक लग गई। 10 फरवरी 2019 में हाईकोर्ट ने रेप से जुड़े सभी मामलों के स्टे रद करने का आदेश जारी किया तो यह मुकदमा फिर शुरू हो सका।

पीड़िता और मुख्य आरोपित की मौत

मुकदमे के दौरान पीड़िता और मुख्य आरोपी नरेश की मौत हो गई। पुलिस ने पीड़िता के मौत की सूचना कोर्ट को दी और नरेश का डेथ सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया। पुलिस के मुताबिक लगभग 20 साल पहले मुख्य आरोपी नरेश की मौत हो गई। इस मामले में दो गवाह की भी मौत हो गई। चौंकाने वाली बात है कि इस मामले में विवेचक ने अभी साक्ष्य तक नहीं पेश किए हैं। पुलिस के गवाह नहीं पेश हुए हैं। आरोपी पप्पू जमानत पर है।

पीड़िता के मजिस्ट्रेटी बयान, उसके पिता, चचेरे भाई के बयान पहले ही कोर्ट में दर्ज हो चुके हैं। आरोपित को हाईकोर्ट के स्टे का फायदा मिल रहा था। स्टे खारिज होने के बाद सुनवाई फिर शुरू हुई है।- मनोज वाजपेयी, एडीजीसी

घटनाक्रम व आरोप

-18 अक्तूबर 1985-पड़ोसी नरेश किशोरी को शादी का झांसा देकर भगा ले गया। लड़की के पिता ने पड़ोसी नरेश पर बहलाकर ले जाने की तहरीर दी। 19 अक्तूबर 1985- नरेश किशोरी इलाहाबाद ले गया। यहां किशोरी के साथ दो लोगों ने दुष्कर्म किया।

-21 अक्तूबर 1985- पिता ने पिता ने नरेश के भाई सुरेश, रमेश, बहन जमुना देवी पर भगाने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाते हुए जूही थाने में मुकदमा दर्ज कराया

-29 अक्तूबर को लड़की इलाहाबाद से बरामद हुई। उसने इलाहाबाद के पप्पू व श्रीचंद्र के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप लगाया। लकड़ी के बयान के आधार पर भी जूही थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई।

-25 नवंबर 1985-पुलिस ने नरेश, उसके भाई सुरेश, रमेश व बहन जमुना देवी के खिलाफ अपहरण, पप्पू व उसके साथी श्रीचंद के खिलाफ दुष्कर्म की धाराओं में चार्जशीट लगाई।

-22 जुलाई 1986- जमानत पर छूट चुका पप्पू हाईकोर्ट से चार्जशीट पर स्टे ले आया। स्टे के चलते स्थानीय पर सुनवाई पर रोक लग गई।
-10 फरवरी 2019 में हाईकोर्ट ने रेप से जुड़े सभी मामलों के स्टे रद करने का आदेश जारी किया।

-35 साल बाद यह फाइल फिर खुल गईं। 22 जनवरी 2020 को किशोरी का मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉक्टर को तलब किया गया। 14 दिसंबर 2020 को सुनवाई है।

Ujjawal Prabhat Android App Download Link
News-Portal-Designing-Service-in-Lucknow-Allahabad-Kanpur-Ayodhya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button