इन छोटे बच्चों की ये शरारतें देखकर आप भी नहीं रोक पाएगे अपनी हँसी, देखिये इन बच्चो की शरारतें…

बच्चों का नाम सुनते ही मासूमियत, भोलापन, मस्तीख़ोरी जैसे चेहरे आंखों के सामने आ जाते हैं। आती हैं। बच्चे शरारती होते हैं, उनके क्रिया -कलापों को आप तर्क की कसौटी पर नहीं कस सकते। वे यदि अपने माता-पिता के साथ भी कहीं मेहमान बन के जाएं, तो ज्यादा देर संजीदगी से नहीं रह सकते। वे जल्दी ही अनौपचारिक हो जाते हैं और उतर आते हैं अपनी शरारतों पर।
बच्चें मन के सच्चे, सबकी आँखों के तारे; उनकी मासूमियत पर तो ऐसे गाने भी बने हैं। लेकिन आजकल के बच्चों की कहानी कुछ अलग है। आज बच्चे कुछ ज्यादा ही मस्तीखोर हो गए हैं। आप थोड़ी देर उनको अकेला छोड़कर चले जाओ, कुछ मिनटों में ही कोई बड़ा कांड हो जाएगा।

बच्चों का दिमाग इतना ज्यादा और तेज़ी से चलता है कि हम बड़े समझ भी नहीं पाते हैं। बच्चों की हरकतें अक्सर ही बड़ों को लाजवाब कर देती हैं।

उनके माता-पिता भी उनकी शरारतों के इस तरह अभ्यस्त हो चुके होते हैं कि फिर उन्हें रोकने-टोकने की बार-बार जहमत नहीं उठाते लेकिन इस तरह के शैतान बच्चे उनके लिए बहुत खतरनाक हो जाते हैं जिनके घर वो जाते हैं। इन बच्चों की हरकतों से उस घर के सदस्य परेशान हो जाते हैं। ऐसे में वो न तो बच्चों को शरारत करने से रोक पाते हैं और न ही लिहाजवश उन्हें डांट पाते हैं। मजबूरन उन्हें झेलना पड़ता है और इस तरह के बच्चों की शैतानी के लिए पूरी तरह जिम्मेदार उनके मां-बाप ही होते हैं।
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ऐसे बच्चों पर नियंत्रण रखने की पहली जिम्मेदारी तो उन्हीं की है। हद तो तब होती है, जब मेजबान बार-बार उन्हें उनके बच्चों
की शरारत की ओर ध्यान दिलाते हैं लेकिन वो तब भी बच्चों की शैतानियों की तरफ गौर नहीं करते।

हम सबके बचपन में हमारे मां-बाप के पास बहुत शिकायतें आती रही होंगी। डोर बेल बजा कर भाग जाने की तो कभी बॉल से खिड़की-दरवाजे के सीसे टूटने की। जिसके बाद डांट भी पड़ती थी।

बच्चों की हरकतें अक्सर ही बड़ों को लाजवाब कर देती हैं। वैसे बच्चे चाहे जैसी हरकतें करें, लगते क्यूट ही हैं। उनकी शैतानियों
पर भी प्यार ही आता है। कभी-कभी तो समझ भी नहीं आता कि उन पर हंसे या नाराज हों।






