अब UP बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा भी रद होने के हैं पूरे आसार, CM योगी जल्द ही इस संबंध में बैठक करके लेंगे निर्णय

UP Board 12th Exam 2021: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं परीक्षा भी रद हो गई है। अब उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की इंटरमीडिएट परीक्षा भी रद होने के पूरे आसार हैं। वजह, सीबीएसई परीक्षा का निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही इस संबंध में बैठक करके निर्णय लेंगे। वैसे यूपी बोर्ड ने मई माह में ही इंटर के परीक्षार्थियों को प्रमोट करने की तैयारियां कर रखी हैं। यूपी बोर्ट के सचिव ने 22 मई को ही सभी कॉलेजों से कक्षा 12 की प्रीबोर्ड और 11 की छमाही व वार्षिक परीक्षा के अंक मांगे थे, 28 मई तक अधिकांश स्कूल छात्र-छात्राओं के अंक का ब्योरा भेज चुके हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहा कि प्रधानमंत्री ने कोविड संक्रमण के दृष्टिगत सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा रद करने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्होंने सभी छात्रों व अभिभावकों की ओर से प्रधानमंत्री को आभार व्यक्त किया। सीएम योगी ने कहा कि यह निर्णय देश भर के छात्रों की स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है। उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने प्रधानमंंत्री नरेद्र मोदी के निर्णय का आभार जताते हुए कहा कि उनके लिए हमेशा से ही बच्चों का भविष्य व स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता रहे हैं। कोरोना काल की परिस्थितियों को देखते हुए बच्चों के हित में लिए गए इस निर्णय से न केवल बच्चों को बल्कि उनके अभिभावकों को भी राहत मिलेगी।

उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि केद्र व राज्य सरकार अपने नागरिकों को कोरोना महामारी से सुरक्षित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही हैं। आज का निर्णय उसी दिशा में लिया गया कदम है। उत्तर प्रदेश की सरकार पूर्व में ही कक्षा 6 से लेकर कक्षा 11 की परीक्षा को रद कर विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का निर्णय  चुकी है। प्रधानमंंत्री द्वारा सीबीएसई की कक्षा 12 की परीक्षा के बारे में लिए गए निर्णय के बाद प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 12 की परीक्षा के बारे में मुख्यमंत्री के साथ बैठक करने के बाद शीघ्र ही निर्णय लिया जाएगा। मालूम हो कि यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षाएं पहले ही रद कर विद्यार्थियों को कक्षा 11वीं में प्रोन्नत किया जा चुका है। हाईस्कूल के 29.9 लाख विद्यार्थियों की प्रोन्नति पर मुहर लग चुकी है। अब इंटरमीडिएट के 26.10 लाख विद्यार्थियों को प्रोन्नति का तोहफा जल्द दिया जा सकता है।

सीबीएसई व यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम लगभग समान : सीबीएसई ने पहले निर्णय लिया कि इस वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा नहीं होगी, परीक्षार्थी अगली कक्षा में प्रमोट होंगे। अब इंटर की परीक्षा भी रद कर दी गई है। सीबीएसई व यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम लगभग समान है लेकिन, दोनों की परीक्षाओं की सूचना देने में अंतर रहा है। सीबीएसई में मासिक टेस्ट के अलावा छमाही व वार्षिक परीक्षा का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन है। केंद्रीय बोर्ड छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन के आधार पर हाईस्कूल में आसानी से प्रमोट कर सकता है। वहीं, यूपी बोर्ड में कक्षा 9वीं की अर्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षा का रिकॉर्ड बोर्ड मुख्यालय नहीं भेजा जाता था। इस बार प्री बोर्ड यानी हाईस्कूल व इंटर परीक्षा से पहले स्कूल स्तर की परीक्षा फरवरी में कराई गई थी लेकिन, उसका रिकॉर्ड बोर्ड के पास नहीं था।

यूपी बोर्ड कॉलेज से पहले ही मांग चुका है रिकॉर्ड : यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल परीक्षा रद करने से पहले ही वित्तविहीन, राजकीय व अशासकीय कॉलेजों से पहले नवीं और हाईस्कूल में प्रीबोर्ड व छमाही का रिकार्ड मांगा गया था। उसी दौरान 22 मई को बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने कक्षा 12 की फरवरी में हुई प्रीबोर्ड परीक्षा का रिकॉर्ड मांगा गया। इंटर के सभी संस्थागत व व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की कक्षा 11वीं की छमाही व वार्षिक परीक्षा का पूर्णांक व प्राप्तांक और कृषि भाग एक के परीक्षार्थियों का कक्षा 11 की छमाही के अंक मांगे गए थे। बोर्ड सचिव ने जिला विद्यालय निरीक्षकों से 28 मई की शाम तक वेबसाइट पर अंक अपलोड करने का निर्देश दिया था, यह कार्य पूरा किया जा चुका है। संभव है कि सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड भी 12वीं की परीक्षा रद करके परीक्षार्थियों को प्रोन्नत कर दे।

मायावती ने किया स्वागत : बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी सीबीएसई बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षाएं रद किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। मायावती ने अपने ट्वीट में लिखा- देश में कोरोना महामारी के चलते बच्चों व बच्चियों की सेहत व सुरक्षा आदि को खास ध्यान में रखकर केंद्र सरकार द्वारा सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा रद करने के लिए गए फैसले का बीएसपी स्वागत करती है, क्योंकि छात्रों व अभिभावकों आदि के साथ-साथ यही समय की मांग भी थी।

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