अब भव्य और आकर्षक नजर आएगा टिहरी जिले में स्थित प्रसिद्ध बूढ़ाकेदार धाम का मंदिर

टिहरी जिले में स्थित प्रसिद्ध बूढ़ाकेदार धाम का मंदिर अब भव्य और आकर्षक नजर आएगा। मंदिर के अंदर का हिस्‍सा अब नए डिजाइन में दिखेगा। केदारनाथ की तर्ज पर मंदिर के अंदर के ऊपरी हिस्से को बनाया जाएगा। जल्द ही इसका निर्माण कार्य आरंभ हो जाएगा।

जिले का प्रसिद्ध धाम बूढाकेदार धाम का प्राचीन मंदिर को अब और भी भव्य व आकर्षक बनाया जाएगा। इसका बाकायदा नक्शा भी तैयार किया गया है। प्राचीन मंदिर को पूर्व में भी नए स्वरूप में तैयार किया गया था, जिसमें करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद अब मंदिर के अंदर जहां पर पत्थर की शिला है। उसका ऊपरी हिस्से में बदलाव किया जाएगा। मंदिर के अंदर के शिखर का हिस्सा पहले लकड़ी से तैयार किया गया था, लेकिन अब इसको केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। इसका बाकायदा नक्शा तैयार किया गया है। मंदिर समिति के सदस्य इसके लिए राजस्थान भी गए हैं, जहां पर मंदिर की सौंदर्यीकरण के लिए पत्थरों का चयन किया गया है। यहीं से कारीगर भी मंदिर निर्माण कार्य के लिए पहुंचेंगे। मंदिर के अंदर के शिखर के हिस्से को राजस्थानी पत्थरों से नक्काशी देकर नया स्वरूप दिए जाने से मंदिर और भव्य एवं आकर्षक दिखेगा।

इस संबंध मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र नेगी ने बताया कि मंदिर के अंदर जहां पर प्राकृतिक पत्थर की शिला है, उसके ऊपरी हिस्से को बदला जाएगा। यहां पर पहले लकड़ी से नक्काशी की गई थी, लेकिन अब केदारनाथ की तर्ज पर मंदिर क गर्भगृह के ऊपरी हिस्से को तैयार किया जाएगा। इसके लिए राजस्थान में पत्थरों का भी चयन किया गया है। क्षेत्र में मनाई जाने वाली मंगशीर की दीपावली के बाद इसका निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। मंदिर के शिखर को नया रूप देने के साथ ही अन्य कार्य भी करवाए जाएंगे।

जानिए बूढ़ाकेदार का इतिहास

बूढ़ाकेदार धाम टिहरी जिले का प्रसिद्ध धाम है। पूर्व में यह केदारनाथ धाम का प्रमुख पैदल मार्ग था। बताया जाता है कि बूढ़ाकेदार नाथ धाम की यात्रा किए बिना केदानाथ धाम की यात्रा अधूरी मानी जाती थी। आदि गुरु शंकराचार्य ने पौराणिक मंदिर की नींव रखी थी। पांडव जब गोत्र हत्या की मुक्ति के लिए स्वर्गारोहण को जा रहे थे, तब वे यहां पहुंचे थे जहां पर भगवान शिव ने उन्हें बूढ़े व्यक्ति के रूप में दर्शन दिए। जिससे पांडव प्रसन्न नजर आए। दर्शन के बाद पांडव यहां से स्वर्गारोहण के लिए निकले। यहां पर धर्मगंगा और बालगंगा का संगम है। दोनों नदियों के बीच बूढ़ाकेदार मंदिर स्थित है। यहां से केदारनाथ के लिए वर्तमान में भी पैदल कांवड़ यात्रा निकलती है। यहां के लोग काफी कम केदारनाथ की यात्रा करते है, क्योंकि बूढ़ाकेदार के दर्शन से केदारनाथ के बराबर फल प्राप्त होता है।

नाथ जाति के लोग होते हैं पुजारी

बूढ़ाकेदार में नाथ जाति के लोग मंदिर के पुजारी होते हैं। पुजारी गांव के ही होते हैं। जो मंदिर के पुजारी होते हैं उनके कान छेदे जाते हैं। मंदिर का पुजारी की मृत्यु होने पर शव को जलाने के बजाय मंदिर परिसर के आस-पास ही दफनाया जाता है और वहां पर छोटे मंदिर जिसे चौंरी कहा जाता है, बनाई जाती है।

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