उत्तराखंड के गंगोत्री धाम में घाटों की सुरक्षा के नहीं इंतजाम, मलबे से पटे गंगा घाट

उत्तरकाशी: देश-विदेश से आने वाले यात्रियों के लिए गंगोत्री धाम में गंगा (भागीरथी) में स्नान करना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। धाम में आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त घाटों का अब तक निर्माण नहीं हो पाया। साथ ही घाटों पर मलबे के ढेर लगे होने के कारण भागीरथी की धारा काफी दूर हो गई है। जिससे यात्रियों को जोखिम उठाकर स्नान करना पड़ रहा है। 

गंगोत्री धाम में भागीरथी नदी के एक किमी लंबे तट पर रोजाना हजारों लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं। लेकिन, यहां सुरक्षित स्नान घाट नहीं हैं। बीते चार वर्षों के दौरान गोमुख क्षेत्र में अधिक बारिश होने के कारण भागीरथी में कई बार उफान आया। वर्ष 2016 में तो भागीरथी का जलस्तर भगीरथ शिला तक पहुंच गया था। इस उफान के कारण गंगोत्री में घाटों को भारी नुकसान पहुंचा। घाटों के ऊपर बड़ी मात्रा में रेत-बजरी व पत्थर जमा हैं और भागीरथी की धारा घाटों से दूर बह रही है। जहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। इसी के चलते वर्ष 2017 में गंगोत्री में एक उद्योगपति समेत तीन यात्रियों की स्नान के दौरान बहने से मौत हो गई थी। लेकिन, इसके बाद भी घाटों की सुध नहीं ली गई। 

दिल्ली से आए यात्री नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि गंगोत्री में घाटों पर सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। जिससे भागीरथी में डुबकी लगाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। प्रशासन को तत्काल इस ओर ध्यान देना चाहिए। उधर, एसडीएम देवेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि अभी भागीरथी में जल का स्तर कम है। लेकिन, बर्फ पिघलने पर कुछ दिनों में पानी घाटों तक आ जाएगा। कुछ घाटों का निर्माण हो चुका है और उन पर सुरक्षा के लिए चेन तो लगाई जा रही है। इसके साथ ही इस बार नेट लगाने की भी योजना है, ताकि सुरक्षा और बेहतर हो सके।

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