वैज्ञानिकों की नई खोज अब प्लास्टिक कचरे से मिलेगी निजात

सेंटर में प्लास्टिक खाने वाले प्राकृतिक बैक्टीरिया पर की जा रही एक्सरे डिफ्रैक्शन प्रक्रिया के दौरान इस बैक्टीरिया को एक्सीडेंटली विकसित किया गया है।

शोध के दौरान प्राकृतिक बैक्टीरिया ताकतवर एंजाइम में तब्दील हो गया। पेटेज सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाली पॉलीइथाइलीन टेरेफेथैलेट (पीईटी) नामक प्लास्टिक की रासायनिक बनावट को तोड़ने में सक्षम है और उसे उसके बुनियादी स्वरूप में बदलने में भी सक्षम है। पीईटी को पानी और कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलें बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।

रिसाइकिल करने की दिक्कतें होंगी दूर

शोधकर्ताओं के अनुसार जब पीईटी से बनी प्लास्टिक बोतलों को एकत्र किया जाता है तो उन्हें वापस प्लास्टिक बोतलों में रिसाइकिल नहीं किया जा सकता। अभी इस तरह की जो प्रकिया है उसमें बोतलों को रिसाइकिल करके बोतलें बनाने से उनकी गुणवत्ता कम हो जाती है। लेकिन इस नए एंजाइम पेटेज से प्लास्टिक बोतलों को गुणवत्ता के साथ रिसाइकिल किया जा सकता है।

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तेजी से बढ़ रहा प्लास्टिक कचरा

– 56 लाख टन भारत हर साल प्लास्टिक कचरा पैदा करता है।

– 10 लाख प्लास्टिक बोतलें हर मिनट दुनियाभर में बेची जाती हैं।

– हर साल ब्रिटेन में प्लास्टिक की 30 अरब बोतलों का इस्तेमाल। केवल 57 फीसदी रिसाइकिल होती है।

– भारत, चीन, इंडोनेशिया, फिलीपींस, विएतनाम और श्रीलंका समुद्र में कचरा फेंकने में सबसे आगे।

– 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक कचरा मौजूद होने की आशंका।

– 24 लाख टन चीन हर साल समुद्र में प्लास्टिक कचरा फेंकता है।

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