नासा उल्कापिंड को मंगल ग्रह पर भेजेगी वापस

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा मंगल ग्रह से आए उल्कापिंड के एक बड़े भाग को मिशन-2020 के तहत वापस भेजने की तैयारी में है। “एसएयू008” नाम का यह उल्कापिंड मंगल ग्रह पर करोड़ों सालों तक रहा था। 1999 में यह उल्कापिंड पृथ्वी से टकराया। टक्कर में इसका सबसे अधिक भाग ओमान देश में गिरा।

नासा के “मार्स 2020 रोवर” को मंगल ग्रह के सतह की जानकारियां जुटाने के लिए भेजा जा रहा है। इसके साथ ही यान में लगे स्कैनिंग हैबिटेबल एनवायर्नमेंट विथ रमन एंड लुमिनसेंस फॉर ऑर्गेनिक एंड केमिकल्स (शरलॉक) लेजर की क्षमता की जांच के लिए उल्कापिंड भी मंगल ग्रह पर जाएगा। इस लेजर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह उल्कापिंड को मनुष्य के बाल के आकार में तोड़ सके। इससे उल्कापिंड की गूढ़ विशेषताओं का आसानी से अध्ययन किया जा सकेगा।

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मालूम हो कि एसएयू008 अपने मूल ग्रह पर लौटने वाला पहला उल्कापिंड होगा। इससे पहले भी कई बार नासा ने लक्षित जांच के लिए रोवर लांच किया है। लक्षित तत्व में पत्थर, धातु या कांच जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं।

शरलॉक के मुख्य जांचकर्ता लुथर बेकले ने कहा, “अब इतना सूक्ष्म अध्ययन किया जा रहा है कि तापमान या रोवर में आई थोड़ी सी भी दिक्कत से हमें अपने लक्ष्य को दोबारा सही करना पड़ेगा। हमें जांच करनी है कि लेजर अपने लक्ष्य को किस तरह देखता है। इससे हम जान पाएंगे कि इस यंत्र का व्यवहार मंगल ग्रह की सतह को लेकर कैसा रहेगा।”

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