सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में नहीं जाएंगे मुलायम, हो सकते हैं ये बड़े 6 कारण
लखनऊ.समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन आगरा में 5 अक्टूबर को होना है। इस अधिवेशन में 25 सितंबर को प्रेस कांफ्रेंस में मुलायम सिंह ने जाने से मना किया था, लेकिन अखिलेश ने पिता का आशीर्वाद मिलने के बाद 28 सितंबर को वह मुलायम को अधिवेशन में आने का निमंत्रण दे आए। जिसके बाद चर्चा शुरू हुई कि मुलायम जायेंगे या नहीं जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि मुलायम सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में नहीं जाएंगे। वहीं, सीनियर पॉलिटिकल जर्नलिस्ट प्रदीप कपूर और रतन मणि लाल ने इसके कारण भी गिनाए हैं।

फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय नहीं
– एक्सपर्ट्स के अनुसार मुलायम का फिर से सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय नहीं है।
– अखिलेश भी जानते हैं कि अगर मुलायम को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया तो 15 महीने पुरानी कहानी फिर दोहराई जा सकती है।
– दरअसल, अधिवेशन में नहीं जाने से मुलायम का एक भ्रम और सम्मान बना रहेगा क्योंकि वह अगर सम्मलेन में जाते हैं और उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनाया जाता है तो यह उनके सम्मान के लिए सही नहीं होगा, जिसके वह अब आदी हो चुके हैं।
– अखिलेश भी जानते हैं कि अगर मुलायम को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया तो 15 महीने पुरानी कहानी फिर दोहराई जा सकती है।
– दरअसल, अधिवेशन में नहीं जाने से मुलायम का एक भ्रम और सम्मान बना रहेगा क्योंकि वह अगर सम्मलेन में जाते हैं और उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनाया जाता है तो यह उनके सम्मान के लिए सही नहीं होगा, जिसके वह अब आदी हो चुके हैं।
शिवपाल यादव से रिश्ते बने रहेंगे
– अधिवेशन में न जाने का एक कारण यह भी है कि उनके छोटे भाई शिवपाल यादव से रिश्ते बने रहेंगे।
– अगर वह अधिवेशन में जाते हैं तो उन पर बेटे के पक्ष में ही खड़ा होने का आरोप लग जाएगा। ऐसे में वह शिवपाल के साथ बने रहेंगे।
– अगर वह अधिवेशन में जाते हैं तो उन पर बेटे के पक्ष में ही खड़ा होने का आरोप लग जाएगा। ऐसे में वह शिवपाल के साथ बने रहेंगे।
परिवार को एकजुट करने का रास्ता खुला रहेगा
– समाजवादी पार्टी के मुखिया रहे मुलायम देश के सबसे बड़े राजनैतिक घराने के भी मुखिया हैं।
– ऐसे में जो राजनीति के साथ-साथ परिवार में फूट पड़ी है। उस परिवार को एकजुट करने के प्रयास का रास्ता खुला रहेगा।
– गाहे-बगाहे मुलायम इसके लिए प्रयास भी करते रहे हैं। अगर वह अधिवेशन में गए तो शिवपाल को फिर परिवार से जोड़ना मुश्किल हो जाएगा।
– ऐसे में जो राजनीति के साथ-साथ परिवार में फूट पड़ी है। उस परिवार को एकजुट करने के प्रयास का रास्ता खुला रहेगा।
– गाहे-बगाहे मुलायम इसके लिए प्रयास भी करते रहे हैं। अगर वह अधिवेशन में गए तो शिवपाल को फिर परिवार से जोड़ना मुश्किल हो जाएगा।
रामगोपाल से नाराजगी बनी रहेगी
– यादव परिवार में वर्चस्व को लेकर जो झगड़ा हुआ उसका सबसे बड़ा कारण मुलायम प्रो. रामगोपाल यादव को मानते हैं।
– अगर वह अधिवेशन में जाते हैं तो रामगोपाल यादव ही मंच का संचालन करेंगे। ऐसे में मुलायम के लिए स्थिति असहज हो जाएगी।
– वहीं, रामगोपाल को शिवपाल यादव भी विलेन ही मानते हैं। ऐसे में रामगोपाल से दूरी बनाकर मुलायम किसी न किसी तरह शिवपाल को अपने करीब रख सकते हैं।
– अगर वह अधिवेशन में जाते हैं तो रामगोपाल यादव ही मंच का संचालन करेंगे। ऐसे में मुलायम के लिए स्थिति असहज हो जाएगी।
– वहीं, रामगोपाल को शिवपाल यादव भी विलेन ही मानते हैं। ऐसे में रामगोपाल से दूरी बनाकर मुलायम किसी न किसी तरह शिवपाल को अपने करीब रख सकते हैं।
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फैमिली का प्रेशर
– इन सबके बीच मुलायम के ऊपर अधिवेशन में न जाने का प्रेशर परिवार की तरफ से भी है।
– सबसे बड़ा प्रेशर मुलायम पर पत्नी साधना गुप्ता और छोटी बहु अपर्णा यादव का है।
– यादव परिवार के झगडे में साधना गुप्ता का नाम तब आया था जब अखिलेश खेमे के एमएलसी उदयवीर सिंह ने मुलायम को चिट्ठी लिख कर साधना गुप्ता पर परिवार को तोड़ने का आरोप लगाया था।
– सबसे बड़ा प्रेशर मुलायम पर पत्नी साधना गुप्ता और छोटी बहु अपर्णा यादव का है।
– यादव परिवार के झगडे में साधना गुप्ता का नाम तब आया था जब अखिलेश खेमे के एमएलसी उदयवीर सिंह ने मुलायम को चिट्ठी लिख कर साधना गुप्ता पर परिवार को तोड़ने का आरोप लगाया था।
अखिलेश के विरोध का रास्ता खुला रहेगा
– यादव परिवार में झगडे के बाद मुलायम को जब भी अखिलेश के खिलाफ बोलना होता है तब यही कहते हैं कि जो पिता का नहीं हुआ जनता का क्या होगा। कहते हैं कि तीन महीने में अध्यक्ष पद वापस करने को कहा था लेकिन अभी तक नहीं किया।
– वहीं, अधिवेशन में जाने के बाद मुलायम यह मौका भी खो देंगे।
– वहीं, अधिवेशन में जाने के बाद मुलायम यह मौका भी खो देंगे।





