MP के शराब कारोबारियों का इस तरह का है रैकेट, गिरोह के मास्टरमाइंड को पकड़ा

इंदौर.ट्रेजरी चालानों में हेराफेरी कर करोड़ों के राजस्व की चोरी करने वाले प्रदेश के पहले और बड़े जालसाज गिरोह खुलासा हुआ है। आबकारी विभाग ने एक ऐसे जालसाज को पकड़ा, जिसने शहर के नौ शराब ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए उनके द्वारा विभाग में जमा करवाए जाने वाले चालानों में गड़बड़ी कर करीब 25 करोड़ से ज्यादा के राजस्व की चोरी की है।

जालसाज से बड़े शराब कारोबारी न सिर्फ सीधे तौर पर जुड़े थे, बल्कि यही उनकी दुकानें भी संचालित करता था। इसका टारगेट करीब 250 करोड़ की जालसाजी का था। कलेक्टर ने डीआईजी को आरोपी और उससे जुड़े नौ ठेकेदारों विजय श्रीवास्तव, अविनाश सिंह मंडलोई, राकेश जायसवाल, योगेंद्र जायसवाल, राहुल चौकसे, सूर्य प्रकाश अरोरा, गोपाल शिवहरे, लवकुश पांडे, प्रदीप जायसवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। पर असिस्टेंट आबकारी कमिश्नर संजीव दुबे के मुताबिक पकड़े गए जालसाज का नाम राजू दशवंत है। यह पहले शराब की दुकान पर सेल्समैन था। इसी ने शातिर दिमाग से जालसाजी कर शराब ठेकेदार (पार्टनर) विजय श्रीवास्तव-अविनाश सिंह मंडलोई के अलावा राकेश जायसवाल, योगेंद्र जायसवाल, राहुल चौकसे, सूर्य प्रकाश अरोरा, गोपाल शिवहरे, लवकुश पांडे, प्रदीप जायसवाल से सांठ-गांठ कर आबकारी विभाग के जरिए शासन को मिलने वाले 25 करोड़ से ज्यादा के राजस्व की चपत लगाई है।
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ऐसे पकड़ाया
आरोपी राजू द्वारा जमा करवाए जा रहे चालान को लेकर विभाग को शंका हुई थी। पिछले तीन महीनों से अधिकारियों ने अपनी टीम के साथ निगरानी शुरु की। पता चला उससे 8 शराब ठेकों से जुड़े 9 ठेकेदार चालान भरवाते हैं । शहर में करोड़ों का व्यापार देने वाली प्रमुख दुकानों के चालान उसके द्वारा 5 से 6 दिन में ही भर दिए जाते थे, जो संभव नहीं है। जब असिस्टेंट आबकारी कमिश्नर दुबे ने विभाग में जमा करवाए जाने वाले चालानों का मिलान ट्रेजरी के चालानों से किया तो मामले का खुलासा हुआ। पता चला 10 हजार की राशि का चालान वह ट्रेजरी में जमा करता तो आबकारी विभाग में जमा होने वाली कापी में राशि बदलकर 20 लाख कर देता था। चालान के आधार पर शराब बेचने की एनओसी जारी हो जाती थी। जब उसे पकड़ा तो ये खुलासे हुए। इसका नेटवर्क कई जिलों में है। सोम डिसलरी के ग्रुप, मिलियन ट्रेडर्स के सूर्यप्रकाश अरोरा से भी जुड़ा है। जांच के बाद एफआईआर के आदेश जारी हुए हैं। वहीं फर्जी चालान पेश करने के मामले में ठेकेदार जितेंद्र, असप्रीत सिंह लुबाना, शिवराम और दीपक जायसवाल के खिलाफ भी एफआईआर के आदेश किए हैं।
आरोपी राजू द्वारा जमा करवाए जा रहे चालान को लेकर विभाग को शंका हुई थी। पिछले तीन महीनों से अधिकारियों ने अपनी टीम के साथ निगरानी शुरु की। पता चला उससे 8 शराब ठेकों से जुड़े 9 ठेकेदार चालान भरवाते हैं । शहर में करोड़ों का व्यापार देने वाली प्रमुख दुकानों के चालान उसके द्वारा 5 से 6 दिन में ही भर दिए जाते थे, जो संभव नहीं है। जब असिस्टेंट आबकारी कमिश्नर दुबे ने विभाग में जमा करवाए जाने वाले चालानों का मिलान ट्रेजरी के चालानों से किया तो मामले का खुलासा हुआ। पता चला 10 हजार की राशि का चालान वह ट्रेजरी में जमा करता तो आबकारी विभाग में जमा होने वाली कापी में राशि बदलकर 20 लाख कर देता था। चालान के आधार पर शराब बेचने की एनओसी जारी हो जाती थी। जब उसे पकड़ा तो ये खुलासे हुए। इसका नेटवर्क कई जिलों में है। सोम डिसलरी के ग्रुप, मिलियन ट्रेडर्स के सूर्यप्रकाश अरोरा से भी जुड़ा है। जांच के बाद एफआईआर के आदेश जारी हुए हैं। वहीं फर्जी चालान पेश करने के मामले में ठेकेदार जितेंद्र, असप्रीत सिंह लुबाना, शिवराम और दीपक जायसवाल के खिलाफ भी एफआईआर के आदेश किए हैं।
ऐसे करता था फर्जीवाड़ा
ट्रेजरी में जमा चालान में कम राशि, लेकिन आबकारी को देने वाली कॉपी में रकम दोगुनी कर देता असिस्टेंट आबकारी कमिश्नर दुबे ने बताया कि राजू दशवंत गिरोह का मास्टरमाइंड है। यह मंदसौर के डोडा चूरा की तस्करी करने वाले अंश त्रिवेदी के साथ मिलकर गिरोह संचालित कर रहा था। आरोपी राजू ने शहर के नौ बड़े ठेकेदारों को फर्जीवाड़े की प्लानिंग समझाकर अपने पक्ष में किया और उनके द्वारा ट्रेजरी के माध्यम से शासन को जमा करवाए जाने वाले चालान की काॅपी में हेरफेर कर अवैध लाभ दिलवाया। शराब ठेकेदारों के चालान ट्रेजरी में जमा करने राजू ही जाता था। वह जो चालान जमा करता था, उसमें काफी कम राशि दर्शाता था वहीं आबकारी विभाग को उसकी रसीद देकर चालान काॅपी देता था तो उस चालान काॅपी में हेरफेर कर राशि को 100 गुना से ज्यादा दर्शा कर लाखों का अमाउंट भर देता था।
ठेकेदार को नहीं बख्शा जाएगा
ये प्रदेश का पहला और अनूठा जालसाजी रैकेट है। राजस्व का नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी ठेकेदार को नहीं बख्शा जाएगा। सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए आदेश दिए हैं।
निशांत वरवड़े, कलेक्टर





