सांसद सुशील कुमार सिंह ने मंदिर में की साफ-सफाई

औरंगाबाद से बीजेपी सांसद सुशील कुमार सिंह ने रफीगंज के बड़ी दुर्गा मंदिर प्रांगण की साफ-सफाई की। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। सांसद सुशील कुमार सिंह ने कहा कि राम से ही हम है, राम सबके है। अगर किसी की बुद्धी मारी गई है, जिसका इलाज संभव नहीं है तो वे लोग मानसिक दिवालिएपन के शिकार है। 

श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में निर्मित भव्य मंदिर में 22 जनवरी को रामलला विराजमान हो रहे हैं। इसे लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है। हालांकि विपक्ष इस धार्मिक कार्यक्रम को राजनीतिक करार देकर विरोध कर रहा है, वहीं बीजेपी द्वारा देशभर में मंदिरों की साफ-सफाई की जा रही है। इसी कड़ी में बिहार के औरंगाबाद के बीजेपी सांसद सुशील कुमार सिंह ने न केवल रफीगंज के बड़ी दुर्गा मंदिर प्रांगण की साफ-सफाई की बल्कि विपक्ष पर भी प्रहार किया।

सांसद ने हाथों में वाइपर और पोछा लेकर मंदिर की साफ-सफाई की। इस कार्य में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने भी सांसद के साथ हाथ बटाया। स्वच्छता अभियान के तहत मंदिर की साफ-सफाई के बाद सांसद ने मां दुर्गा की आराधना भी की। गौरतलब है कि अयोध्या में निर्मित श्रीराम मंदिर में रामलला के विराजमान होने की खुशी में बीजेपी 14 से 22 जनवरी तक स्वच्छता अभियान के तहत मंदिरों, मठों एवं आसपास के परिसरों में साफ-सफाई का मिशन चला रही है। इसी क्रम में बड़ी देवी दुर्गा मंदिर प्रांगण की सफाई की गई।

500 वर्षों का संघर्ष
इस मौके पर सांसद ने कहा कि यह भारत के लिए ऐतिहासिक पल है। देश ही नहीं विदेश में भी भव्य मंदिर में रामलला के विराजमान होने का इंतजार कर रहे है। यह भारत के लिए स्वर्णिम पल है, जिसके तहत पूरे भारत में धार्मिक स्थलों पर साफ सफाई का अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों से संघर्ष के बाद रामलला भव्य मंदिर में विराजमान होने जा रहे है।

राम से ही हम है
रामलला की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह का विरोध करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए सांसद ने कहा कि श्रीराम मंदिर का विरोध अपने अस्तित्व का विरोध है। राम से ही हम है, राम सबके है। अगर किसी की बुद्धी मारी गई है, जिसका इलाज संभव नहीं है तो वे लोग मानसिक दिवालिएपन के शिकार है। 

पक्ष में विचार का अभाव है
उन्होंने कहा कि रामजन्म भूमि तीर्थ ट्रस्ट ने सभी देशवासियों को पूरे सम्मान के साथ आमंत्रण भेजा है, लेकिन विपक्ष के कुछ दलों ने इसका बहिष्कार किया है। निमंत्रण और न्यौता का बहिष्कार किया है। दरअसल, उनमें विचार का अभाव है, इसीलिए उन लोगों ने ऐसा निर्णय लिया। 

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