UP की जेलों में बंद हैं 250 से ज्यादा HIV कैदी

- in उत्तरप्रदेश

मेरठ: उत्तरप्रदेश की जेलों में एचआईवी पीड़ितों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ती ही जा रही है. मेरठ जेल में 10 कैदियों के एचआईवी पॉज़िटिव होने की पुष्टि हुई है. मेरठ के अलावा गोरखपुर, उन्नाव और गाजियाबाद की जेलों में भी बड़ी संख्या में एचआईवी संक्रमित कैदियों की पुष्टि हो चुकी है.

UP की जेलों में बंद हैं 250 से ज्यादा HIV कैदी

इससे पहले उन्नाव जेल में कैदियों के मेडिकल परीक्षण के बाद आई रिपोर्ट में 58 कैदी एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे उसके बाद उत्तरप्रदेश की जेलों में बंद कैदियों का एचआईवी परीक्षण कराया गया था. गोरखपुर की जेल में लगभग डेढ़ हजार कैदी हैं. इस साल हुए परीक्षण में 27 कैदी एचआईवी पॉज़िटिव पाए गए, हालाँकि पिछले वर्ष 49 कैदी एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे जिसके मुकाबले ये संख्या कम भले ही हो परन्तु ये स्थिति चिंतनीय है. अब मेरठ जिला जेल में भी 10 कैदियों के एचआईवी पॉज़िटिव होने कि पुष्टि की गई है इन कैदियों का इलाज मेरठ मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में चल रहा है.एआरटी कॉलेज के सीएमओ डॉक्टर राजकुमार के अनुसार -ये सभी कैदी विचाराधीन कैदी हैं और जेल आने से पूर्व ही एचआईवी संक्रमित हो चुके थे.

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उत्तरप्रदेश की 70 जेलों में अब तक लगभग 250 से ज्यादा कैदियों के एचआईवी पॉज़िटिव होने की ख़बरें आ रही हैं. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी इन पर लगातार नज़र रख रहा है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी की गोरखपुर जिला जेल में 4 महीने के दौरान 24 कैदियों के एचआईवी संक्रमित पाए जाने की ख़बरों का स्वत: संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को इस बाबत 7 मार्च को नोटिस जारी किया था. उसके बाद गाजियाबाद जेल और अब मेरठ से यह खबर सामने आई है जिसने राज्य सरकार की चिंता तो जरूर बढ़ाई है लेकिन इसकी रोकथाम के लिए क्या उपाय किए जाएं इस पर सरकार भी बेबस नज़र आ रही है.जेल और स्वास्थय महकमा मामलों के प्रकाश में आने पर अक्सर ही ये बचाव लेने का प्रयास करता रहता है कि जिन कैदियों में पुष्टि हुई है उनमें से ज्यादातर जेल में आने के पूर्व में ही एचआईवी संक्रमित थे.गोरखपुर,गाज़ियाबाद,उन्नाव के बाद अब मेरठ की जिला जेल में भी 10 कैदी एचआईवी पॉज़िटिव पाए गए हैं। उत्तर प्रदेश की जेलों में एचआईवी संक्रमित कैदियों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से बढ़ रही है जोकि बेहद गंभीर मामला है इस बाबत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए को उत्तरप्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर दिया है. हालाँकि मेरठ का मामला प्रकाश में आने के बाद ये कहा जा रहा है कि ये सभी कैदी विचाराधीन कैदी हैं और जेल आने से पहले ही ये एचआईवी संक्रमित थे.

 

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