नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी रविवार को 35वीं बार मन की बात की। मोदी ने बातचीत की शुरुआत राम रहीम रेप केस के फैसले के बाद भड़की हिंसा से की। मोदी ने कहा, “आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी। सरकार दोषियों को सजा देगी।” पिछली बार मोदी ने कहा था, “जीएसटी लागू होने के बाद ग्राहकों का व्यापारियों पर भरोसा कायम हुआ है। एक ही महीने में इसके फायदे दिखने लगे हैं।” उन्होंने ये भी कहा कि 1942 में आजादी के लिए संकल्प लिया गया था। 5 साल में इसे पूरा करके दिखाया गया। इस बार हमें संकल्प लेना चाहिए कि गरीबी भारत छोड़ो, आतंकवाद भारत छोड़ो, गंदगी भारत छोड़ो। 2022 में इसे सिद्ध करके दिखाएं।
ये बुद्ध का देश है…
– मोदी ने कहा, “एक ओर देश उत्सवों में डूबा है, दूसरी ओर एक ओर हिंसा की खबरें आती हैं। ये देश बुद्ध का देश है। अहिंसा परमो धर्म।”
– “मैंने लालकिले से कहा था कि आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी। चाहे वह धर्म या व्यक्ति के खिलाफ हो बर्दाश्त नहीं होगी। ये देश और सरकार इसके दोषियों को सजा देगी।”
जीएसटी पर दुनियाभर में लिखा जाएगा
– मोदी ने कहा, “जीएसटी के लिए कई लेटर और मैसेज आए। एक महीने में ही इसके फायदे दिखने लगे हैं।”
– “मुझे खुशी होती है कि गरीबों के लिए चीजों के दाम कैसे कम हो गए हैं। कारोबार आसान हो गया है। कारोबारियों की आय बढ़ी है।”
– “ट्रकों की रफ्तार बढ़ने से पॉल्यूशन कम हुआ है। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक सिस्टम आसान हो गया है। गुड एंड सिम्पल टैक्स से स्मूथ ट्रांजैक्शन हुए हैं। पूरी दुनिया में इकोनॉमी के जानकार इस पर रिसर्च करके जरूर लिखेंगे।”
क्रांति का महीना है अगस्त
– मोदी ने कहा, “अगस्त का महीना एक तरह के क्रांति का महीना है। एक अगस्त को असहयोग आंदोलन और 9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ।”
– “15 अगस्त को देश आजाद हुआ। अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा डॉक्टर यूसुफ मेहर अली ने दिया। युवा पीढ़ी को इसे जानना चाहिए।”
– “इस आंदोलन से जुड़कर लोग अंग्रेज सरकार के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन का हिस्सा बन गए थे। गांधीजी के कहने पर लाखों लोग करो या मरो के नारे पर खुद को आजादी के लिए झोंक रहे थे। अंग्रेजों ने महापुरूषों को जेल में डाल दिया। 1920 और 1942 में बापू के आंदोलन के दो रूप दिखाई देते हैं।”
इस बार संकल्प लें, 5 साल में सिद्ध करें
– मोदी ने कहा, “भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम 1857 से शुरू हुआ था। आंदोलन में हर कोई कुछ न कुछ करने के लिए तैयार रहा। लोग आते और जुड़ते गए।”
– “1942 आंदोलन की चरम सीमा पर पहुंचा। अगले 5 साल में अंग्रेजों को देश छोड़कर जाना पड़ा। ये निर्णायक साल थे। हम 1947 में हम आजाद हुए।”
– “अब 2017 में 70 साल हो चुके हैं। कई सरकार आईं। मैं देख रहा हूं कि 2017 से 2022 के लिए नया संकल्प लें। अगर देशवासी संकल्प ले कि मैं देश के लिए क्या करूंगा तो अगले 5 साल भी भारत के भविष्य के लिए निर्णायक बन सकते हैं।”
– “2022 में जब हम आजादी के 75 साल मनाएंगे तो नारा हो कि नए भारत के लिए गरीबी भारत छोड़ो, सांप्रदायिकता भारत छोड़ो, बेईमानी भारत छोड़ो, गंदगी भारत छोड़ो, आतंकवाद भारत छोड़ो और जातिवाद भारत छोड़ो।”
– “सभी लोग न्यू इंडिया के लिए कुछ न कुछ संकल्प लें। नए आइडिया उजागर कर सकते हैं। एक व्यक्ति के रूप में मेरा क्या योगदान हो सकता है। हम कहीं हो ना हों ऑनलाइन जरूर होते हैं। इंटरनेट पर अपने आइडिया सोशल मीडिया और ब्लॉग में शेयर करें।”
बेटियों की हार को देश ने कंधे पर उठाया
– मोदी ने कहा, “हमारी बेटियां शिक्षा के अलावा कई क्षेत्रों में देश का नाम रोशन कर रही हैं। पिछले दिनों हमारी बेटियां महिला क्रिकेट वर्ल्डकप के फाइनल में पहुंचीं।”
– “वे इसे जीत नहीं पाईं तो थोड़ी मायूस थीं। मुझसे मिलीं तो मैंने कहा कि आजकल मीडिया आप लोगों से अपेक्षाएं इतनी बढ़ा देता हैं कि हमें हमेशा सफलता की उम्मीद होती हैं।”
– “मैं देश की बेटियों भारत का मान बढ़ाने के लिए बधाई देता हूं। ये पहली बार हुआ कि बेटियों की हार को पूरे देश ने अपने कंधों पर ले लिया।