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सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के आदेश पर रजिस्ट्रार पद से हटे मृत्युंजय मिश्रा

देहरादून: चर्चित अधिकारी डॉ मृत्युंजय मिश्रा के आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय का कुलसचिव पदभार संभालने के एक दिन बाद ही सरकार को अपने फैसले पर रोलबैक करना पड़ा। मुख्यमंत्री के आदेश पर मिश्रा को कुलसचिव पद से हटाते हुए आयुष महकमे में संबद्ध किया गया है। आयुष सचिव आरके सुधांशु ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए। मिश्रा की तैनाती को लेकर सरकार को सत्तारूढ़ दल के भीतर से ही रोष झेलना पड़ा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को ज्ञापन देकर मिश्रा की नियुक्ति पर तीखी आपत्ति जताई।सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के आदेश पर रजिस्ट्रार पद से हटे मृत्युंजय मिश्रा

उधर, विश्वविद्यालय में कुलसचिव पदभार ग्रहण करते ही मिश्रा फिर विवादों में घिर गए हैं। उनकी नियुक्ति का विरोध करने वाले प्रभारी कुलसचिव डॉ राजेश कुमार को उन्होंने एकतरफा कार्यमुक्त कर मूल आयुर्वेदिक व यूनानी महकमे में वापस भेज दिया। शासन और कुलपति को विश्वास में लिए बगैर मिश्रा की इस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। 

शासन से नियुक्ति का आदेश मिलने पर डॉ मृत्युंजय कुमार मिश्रा ने बीते रोज विश्वविद्यालय पहुंचकर एकतरफा कार्यभार ग्रहण कर लिया। उनके कार्यभार ग्रहण करने के मौके पर कुलपति गैर मौजूद थे। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो डॉ मृत्युंजय ने बीते रोज जिस अंदाज में पुलिस की मौजूदगी में कार्यभार ग्रहण किया था, वह सरकार को नागवार गुजरा। रही सही कसर विद्यार्थी परिषद के रोष ने पूरी कर दी। परिषद के प्रदेश संगठन मंत्री प्रदीप शेखावत ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में डॉ मृत्युंजय को विवादित बताते हुए उनके खिलाफ लगे आरोपों की विस्तृत जांच की मांग की।

उन्होंने कहा कि उक्त अधिकारी प्रदेश में ही नहीं रहना चाहिए। सरकार को ऐसे अधिकारी को किसी भी विश्वविद्यालय अथवा संस्थान में पद नहीं देना चाहिए। परिषद के विरोध ने असर दिखाया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तुरंत मामले में हस्तक्षेप करते हुए मिश्रा को हटाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर अमल करते हुए आयुष शिक्षा महकमे ने मिश्रा को हटाते हुए सचिवालय से ही संबद्ध करने के आदेश जारी कर दिए। आयुष शिक्षा सचिव आरके सुधांशु ने आदेश जारी होने की पुष्टि की।

 कुलपति ने नहीं किया अनुमोदन

उधर, कुलसचिव पदभार ग्रहण करने के बाद मिश्रा एक बार फिर विवादों से घिर गए। उन्होंने शासन के आदेश से प्रभारी कुलसचिव के रूप में कार्यरत डॉ राजेश कुमार को पद से हटाते हुए उन्हें मूल आयुर्वेदिक व युनानी अधिकारी के पद के लिए कार्यमुक्त करने के आदेश शुक्रवार को जारी किए। कुलपति की गैर मौजूदगी में उनके अनुमोदन के बगैर ही शासन के आदेश को मिश्रा ने दरकिनार कर दिया। डॉ राजेश कुमार को पदमुक्त करने के संबंध में आयुष सचिव आरके सुधांशु ने जानकारी से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि मिश्रा शासन के किसी आदेश की अवहेलना नहीं कर सकते।

गौरतलब है कि राजभवन इससे पहले भी मिश्रा की विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद पर सरकार की ओर से की गई नियुक्ति पर सवाल खड़े कर चुका है। मिश्रा की नियुक्ति और कार्यप्रणाली को लेकर उठे विवादों का नतीजा ये रहा कि सरकार ने उन्हें विश्वविद्यालय से हटाकर अपर स्थानिक आयुक्त नई दिल्ली में तैनात किया था, लेकिन बीते दिनों सरकार ने अपर स्थानिक आयुक्त पद पर उनकी नियुक्ति रद कर उन्हें मूल महकमे में भेजने के आदेश दिए थे। 

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