करीब एक दशक के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री चोगम शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. 2009 से पर्थ , कोलंबो और माल्टा चोगम बैठकों में भारतीय प्रधानमंत्री ने हिस्सा नहीं लिया था. भारत सरकार का कहना है कि चोगम शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की उपस्थिति यह संकेत देती है कि देश विभिन्न वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है.

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ब्रिटेन में भारत के उप उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा कि बहुपक्षीय निकायों के साथ भारत का संपर्क लगातार बढ़ रहा है और राष्ट्रकुल अलग नहीं है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत अब स्पष्ट रूप से नेतृत्वकारी भूमिका निभाना चाहता है. पटनायक ने कहा कि भारत राष्ट्रकुल का सबसे बड़ा देश है और ब्रिटेन चाहता है कि वह इसमें अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाए.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रकुल के अंदर गतिविधियां बढ़ाकर भारत इसमें अपना संपर्क बढ़ा सकता है. इसमें अधिक संसाधनों और श्रमबल के अलावा वित्तीय योगदान शामिल है. वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री के सम्मेलन में भाग लेने की एक वजह राष्ट्रकुल प्रमुख महारानी एलिजाबेथ दो द्वारा उन्हें व्यक्तिगत रूप से भेजा गया पत्र भी है. यह महारानी की मेजबानी वाला आखिरी चोगम सम्मेलन होगा.

91 वर्षीय महारानी एलिजाबेथ दो लंबी यात्रा नहीं कर सकतीं , तो ऐसे में वह अन्य चोगम सदस्यों द्वारा भविष्य में होने वाले सम्मेलनों में भाग नहीं ले सकतीं. चोगम सम्मेलन प्रत्येक दो साल में होता है. इससे इस तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी हैं कि क्या महारानी के पुत्र और उत्तराधिकारी प्रिंस चार्ल्स को इस संगठन (चोगम) का अगला प्रमुख नियुक्त किया जा सकता है.