मथुरा: ‘श्रीकृष्ण विराजमान’ की अपील, सुनवाई के लिए आज की तारीख तय

मथुरा। श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से श्री कृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक और मंदिर की जमीन से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग को लेकर सिविल जज की अदालत से याचिका के खारिज होने के बाद सोमवार को वादी पक्ष को ओर से जिला जज की कोर्ट में अपील की गई। वादी पक्ष के अधिवक्ताओं को दलीलों को सुनने के बाद जिला जज ने मामले की सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की है।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक और शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग को लेकर अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री सहित छह अन्य की ओर से सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में पूर्व में याचिका दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 30 सितंबर को याचिका को खारिज कर दिया था। अब इस मामले को लेकर जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत में सोमवार को अपील की गई। अपीलकर्ता के अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन भी मौजूद थे। दोपहर बाद जिला जज की अदालत में श्रीकृष्ण विराजमान के अधिवक्ताओं की दलीलों को करीब 2 घंटे तक सुना और उसके बाद मामले में 16 अक्टूबर की तारीख दे दी है।

अगली सुनवाई तक फैसला सुरक्षित

मीडिया से बातचीत के दौरान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने बताया कि कोर्ट में विस्तृत रूप से सारे सबूतों को रखा गया। कोर्ट ने फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने अगली तारीख 16 अक्टूबर दी है। साथ ही उन्होंने बताया कि जो याचिका पूर्व में खारिज की गई थी उसी का संज्ञान लेने के लिए कोर्ट ने अगली सुनवाई तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है।

धोखेबाजी से और स्वार्थपूर्ण ढंग से हुआ था समझौता: हरिशंकर जैन

हरिशंकर जैन कहते हैं कि 1968 में मंदिर-मस्जिद को लेकर जो समझौता हुआ, वह धोखेबाजी से और स्वार्थपूर्ण ढंग से हुआ। उनका कहना है कि श्री कृष्ण जन्मस्थान का अच्छा खासा भू-भाग शाही मस्जिद ईदगाह को दे दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सीनियर डिविजन जज की ओर से जो याचिका खारिज की गई और जो निर्णय लिया गया वह गलत है। भक्त अपनी याचिका दायर कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि केस में होल्ड किया है कि भक्त या खुद भगवान केस फाइल कर सकते हैं।

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