Makar Sankranti : शत्रुओं पर विजय हो या फिर सुख-समृद्धि की कामना, इस विधि से ही सफल होगी सूर्य साधना

ज्योतिष में सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है। सूर्य की साधना-आराधना के लिए मकर संक्रांति पावन पर्व बहुत ही शुभ होता है। इस दिन भगवान सूर्यदेव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन भगवान भास्कर की उत्तरायण गति प्रारंभ होती है। मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान-दान आदि करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है, लेकिन सूर्य की कृपा पाने के लिए उनकी साधना-आराधना में कुछ नियम भी हैं, जिनका पूरा पालन करना पड़ता है। 

— सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात् सूर्य के मंत्र ॐ घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप या आदित्य हृदय स्तोत्रम् का तीन बार पाठ करें।  

— बाकी दिनों में सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए उगते हुए सूर्य की अथवा सूर्योदय के एक घंटे के भीतर तांबे के पात्र से अर्घ्य दें। 

— अर्घ्य देने से पूर्व जल में रोली, चावल और लाल फूल डालना न भूलें। 

— सूर्यदेव की साधना सदैव पूर्व की दिशा की तरफ मुख करके ही करें। 

—  जल के पात्र को सिर के उपर उठाकर ही सूर्य को अर्घ्य दें।

— मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए तिल, गुड़, लाल चंदन, लाल कपड़ा और तांबे के बर्तन का दान करें। 

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