भगवान शिव हैं इन 8 संतानों के पिता, इस बात से अभी तक आप होंगे अंजान…

भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है. ये तो सभी जानते हैं कि भगवान शिव और माता पार्वती की दो संताने हैं गणेश और कार्तिकेय, लेकिन भगवान शिव की अन्य संतानों का जिक्र बहुत कम होता है? आइए जानते हैं भगवान शिव की आठ संतानों के बारे में….

भगवान गणेश शिवजी और माता पार्वती के पुत्र हैं. धार्मिक कथाओं के अनुसार, पुराणों में गणेश जी के जन्म से जुड़ीं कई कथाएं मिलती हैं. कहीं ये वर्णन किया है कि गणेश जी का जन्म भगवान शिव और माता पार्वती के द्वारा रहस्यमयी ढंग से हुआ था. तो किसी कथा में कहा गया है कि माता पार्वती के शरीर से उतरे मैल से गणेश का जन्म हुआ था.

हिन्दू धर्म से जुड़ा पौराणिक इतिहास अपने आप में बेहद अद्भुत है. कथाओं के अनुसार, एक समय था जब तारकासुर नामक असुर का आतंक अपने चरम सीमा पर था. स्वर्ग में बैठे देवताओं के लिए वह एक दहशत बनता जा रहा था. तारकासुर को यह वरदान प्राप्त था कि भगवान शिव और माता पार्वती की संतान ही उसका विनाश कर सकती है. शिव के अंदर क्रोध की ज्वाला से निकली अग्नि को स्वयं अग्नि देव भी सहन नहीं कर पा रहे थे. इसलिए गंगा जी इस अग्नि को सरवन झील तक ले गईं जहां छह मुख वाले बच्चे ने जन्म लिया. माता पार्वती ने इन छ: सिरों को जोड़कर एक सिर में परिवर्तित किया. इन्हें छ: अप्सराओं ने पाला इसलिए इनका नाम कार्तिकेय पड़ा. कार्तिकेय ने आगे चलकर देवताओं की सेना का नेतृत्व कर तारकासुर का अंत किया था.

पद्म पुराण में भी शिव की पुत्री अशोक सुंदरी का जिक्र किया गया है. माना जाता है कि देवी पार्वती अपने अकेलेपन और उदासी से मुक्ति पाने के लिए कल्प वृक्ष से पुत्री की कामना की जिससे एक सुंदर सी पुत्री का जन्म हुआ. इसलिए उसका नाम अशोक सुंदरी रखा गया.

हिंदू पौराणिक कथाओं में मनसा देवी को ‘नागिनी’, या ‘विशाहरा’ के रूप में भी जाना जाता है. कहा जाता है कि वह ऋषि कश्यप और कद्रू की बेटी और वासुकी की बहन हैं. कहा जाता है कि उन्हें उनके पिता शिव और पति जगत द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था. 

तमिलनाडु स्थित शिव मंदिरों में अलग-अलग अवसरों पर भगवान शिव के तेज से उत्पन्न हुई उनकी पुत्री ज्योति की पूजा की जाती है. एक अन्य कथा के अनुसार, ज्‍योति का जन्‍म माता पार्वती के माथे से निकले तेज से हुआ था.

अंधक- धार्मिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव ध्यान मुद्रा में थे तभी माता पार्वती ने पीछे से आकर अपने हाथों से भगवान शिव की आंखों को बंद कर दिया. ऐसा करने से पूरे संसार में अंधेरा छा गया. जैसे ही माता पार्वती के हाथों का स्पर्श भगवान शिव के शरीर पर हुआ, वैसे ही भगवान शिव के शरीर से पसीने की बूंदें गिरने लगीं. इससे एक बालक का जन्म हुआ जो कि अंधकार में उत्पन्न होने की वजह से वह बालक अंधा था. इसलिए, उसका नाम अंधक रखा गया था.

हिंदू पौराणिक कथाओं में जालंधर को असुरों का राजा कहा गया है. जालंधर एक सक्षम और बलवान शासक था. उसके नेतृत्व में असुरों ने देवों को भी हराया था. वह स्वयं एक असुर नहीं था, लेकिन शिव की तीसरी आंख से निकली क्रोध अग्नि समुद्र में जा गिरी जिससे जालंधर की उत्पत्ति हुई थी. वह शिव का ही अंश था. पद्म पुराण के अनुसार, जालंधर शहर का नाम उनके नाम पर रखा गया है.

अयप्पा, भगवान शिव और भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की संतान है. जब असुर राजा महिषासुर को छल से मारा था तब देवताओं से बदला लेने के लिए उसकी बहन महिषी ने घोर तपस्या की और ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर अजेयता का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा ने कहा कि यह संभव नहीं है. इसलिए महिषी ने योजना बनाई और वरदान मांगा कि सिर्फ शिव और विष्णु की संतान उसे मार सकती है (दोनों पुरुष हैं और किसी को भी जन्म देने की कोई संभावना नहीं है). देवताओं ने शिव और विष्णु को इस तबाही से बचाने के लिए प्रत्यारोपित किया और विष्णु ने समस्या का एक समाधान पाया. इस प्रकार भगवान विष्णु के मोहिनी रूप का भगवान शिव से मिलन हुआ और अयप्पा का जन्म हुआ, जिसने बाद में महिषी का अंत कर दिया.

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