MP शराब कारोबारियों ने लाइसेंस फीस पर नहीं दिया करोड़ों रुपए का सर्विस टैक्स

भोपाल। कस्टम-सेंट्रल एक्साइज विभाग ने प्रदेश के आबकारी ठेकेदार, कारोबारी और लाइसेंसियों पर करोड़ों रुपए के सर्विस टैक्स की वसूली निकाली है। दो साल पहले लागू हुए सर्विस टैक्स को कई कारोबारियों ने अब तक जमा ही नहीं कराया। उधर, नोटिस मिलने पर मप्र पर्यटन विकास निगम 22.5 लाख रुपए जमा करा चुका है।भोपाल। कस्टम-सेंट्रल एक्साइज विभाग ने प्रदेश के आबकारी ठेकेदार, कारोबारी और लाइसेंसियों पर करोड़ों रुपए के सर्विस टैक्स की वसूली निकाली है। दो साल पहले लागू हुए सर्विस टैक्स को कई कारोबारियों ने अब तक जमा ही नहीं कराया। उधर, नोटिस मिलने पर मप्र पर्यटन विकास निगम 22.5 लाख रुपए जमा करा चुका है।  कस्टम-सेंट्रल एक्साइज विभाग ने केवल भोपाल क्षेत्र में ही करीब 20 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली निकाली है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि डिस्टलरी, ब्रेवरीज, बॉटलिंग यूनिट्स एवं विदेशी मदिरा के छोटे-बड़े सभी लाइसेंसी सहित करीब दो दर्जन से अधिक विभिन्न श्रेणी के कारोबारियों को सर्विस टैक्स के दायरे में शामिल किया गया है। बीयर बार, रेस्टोरेंट और शराब की दुकानें भी इनमें शामिल हैं। विभाग द्वारा इन सभी डिफाल्टर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।  विभाग ने शराब कारोबारियों पर 1 अप्रैल 2016 से लाइसेंस फीस पर 15.36 प्रतिशत सर्विस टैक्स लागू किया है। कई कारोबारियों को इस बारे में विभाग के नोटिस से जानकारी मिली, मप्र पर्यटन विकास निगम को जब यह जानकारी दी गई तो उसने प्रदेश के सभी जिलों से जानकारी बुलाकर विभाग में करीब 22.5 लाख रुपए का सर्विस टैक्स जमा करा दिया।  प्रदेश के शराब कारोबारियों पर करोड़ों रुपए का सर्विस टैक्स निकल रहा है। इनमें डिस्टलरी के मालिक भी शामिल हैं। विभाग ने अभी डिफाल्टर्स की सूची का खुलासा नहीं किया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि अंतिम नोटिस का जवाब मिलने के बाद सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।

कस्टम-सेंट्रल एक्साइज विभाग ने केवल भोपाल क्षेत्र में ही करीब 20 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली निकाली है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि डिस्टलरी, ब्रेवरीज, बॉटलिंग यूनिट्स एवं विदेशी मदिरा के छोटे-बड़े सभी लाइसेंसी सहित करीब दो दर्जन से अधिक विभिन्न श्रेणी के कारोबारियों को सर्विस टैक्स के दायरे में शामिल किया गया है। बीयर बार, रेस्टोरेंट और शराब की दुकानें भी इनमें शामिल हैं। विभाग द्वारा इन सभी डिफाल्टर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

विभाग ने शराब कारोबारियों पर 1 अप्रैल 2016 से लाइसेंस फीस पर 15.36 प्रतिशत सर्विस टैक्स लागू किया है। कई कारोबारियों को इस बारे में विभाग के नोटिस से जानकारी मिली, मप्र पर्यटन विकास निगम को जब यह जानकारी दी गई तो उसने प्रदेश के सभी जिलों से जानकारी बुलाकर विभाग में करीब 22.5 लाख रुपए का सर्विस टैक्स जमा करा दिया।

प्रदेश के शराब कारोबारियों पर करोड़ों रुपए का सर्विस टैक्स निकल रहा है। इनमें डिस्टलरी के मालिक भी शामिल हैं। विभाग ने अभी डिफाल्टर्स की सूची का खुलासा नहीं किया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि अंतिम नोटिस का जवाब मिलने के बाद सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।

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