जानें क्यों किया एक ने अपने कलेजे के टुकड़े को खुद से किया अलग

अबोहर। एक मां की मजबूरी आपके दिल को झकझाेर देगी। वह अपने कलेजे के टुकड़े को खुद से अलग करना चाहती है। गरीबी से लाचार यह मां अपने बच्‍चों को पालने में असमर्थ है। इस कारण वह सबसे छोटी डेढ़ साल की बेटी को ट्रेन में छोड़कर चली गई। वह बठिंडा चली गई लेकिन ममता न खत्‍म हुई अौर बेटी को तलाश्‍ा में अगले दिन यहां रेलवे स्‍टेशन पहुंच गई। तब तक बच्‍ची को ट्रेन में राेती देख जीआरपी ने अपने कब्‍जे में लेकर प्रशासन को सौंप दिया था। महिला चाहती है कि बच्‍ची को कोई गोद ले ले ताकि उसका पालन पोषण हाे जाए। प्रशासन अब इसकी संभावना तलाश रहा है।जानें क्यों किया एक ने अपने कलेजे के टुकड़े को खुद से किया अलग

गरीबी से लाचार मां ने डेढ़ साल की बच्ची को ट्रेन में छोड़ा

जीआरपी को दो दिन पहले यहां रेलवे स्‍टेशन पर एक ट्रेन में डेढ़ साल की एक बच्‍ची रोती हुई मिली। जीआरपी के जवानों ने उसे अपनी निगरानी में ले लिया। बच्‍ची से पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह अपनी मां के साथ यहां आई थी और उसे ट्रेन में छोड़कर मां कहीं चली गई। ठंड के कारण बच्‍ची की हालत खराब हो जाने के कारण जीआरपी ने बच्ची को श्री बालाजी मानव सेवा समिति के माध्यम से एक निजी अस्‍पताल में भर्ती कराया।

उधर बच्‍ची को छोड़ कर गई महिला अगले दिन मंगलवार को उसका हाल जानने अबोहर रेलवे पर पहुंची तो जीआरपी कर्मियों ने उससे पूछताछ की। महिला ने सारी बात बता दी और बताया कि वह गरीबी के कारण बेटी को पालने में असमर्थ है। इसी कारण वह उसे ट्रेन में छोड़कर गई थी ताकि उसे कोई अपना ले।

अब बच्ची प्रशासन की देखरेख में रहेगी। प्रशासन ने इस बच्ची को गोद देने की कार्रवाई शुरू कर एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी डीसी को रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर तय किया जाएगा कि महिला के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए।

महिला ने बताया कि वह प्रेम नगर में रहती है और उसके चार बच्चे हैं। पति मजदूरी करता है। वह अक्सर बाहर रहता है। इस कारण खाने के भी लाले पड़े रहते हैं। इस कारण वह चाहती थी कि उसके चार बच्‍चों में से छोटी बेटी को काेई गोद ले ले। महिला के अनुसार, उसने सोचा कि छोटी बेटी काे ट्रेन मेंं छोड़ देगी तो कोई तरस खाकर उेस अपना लेगा।

इसके बाद वह अपने दो बच्‍चों को लेकर स्‍टेशन आई आैर डेढ़ साल की बेटी को एक ट्रेन में छोड़़कर चली गई। महिला खुद अन्य बच्चे के साथ बठिंडा चली गई। बच्ची को गाड़ी में रोता देख यात्रियों ने जीआरपी सूचना दी। जीआरपी ने बच्ची को अपने संरक्षण में लेकर इसकी सूचना बालाजी मानव सेवा समिति के सदस्यों को दी। समिति के सदस्यों ने बच्ची के परिजनों का पता लगाने के प्रयास शुरू कर दिए।

बच्‍ची को ठंड लग गई थी कि इस कारण समिति के सदस्‍याें ने उसे गोशाला रोड स्थित एक अस्पताल में दाखिल करवाया। पूरी रात उसकी देखभाल की। मंगलवार को महिला फिर स्‍टेशन पर आई और वहां बच्‍ची को ढ़ूढ़ने लगी। रेलवे स्टेशन पर तैनात जीआरपी कर्मियों ने म‍हिला को किसी को ढ़ूंढ़ते देखा तो उससे पूछताछ की।

इस पर महिला ने बच्‍ची को ट्रेन में छोड़ने की बात कबूल कर ली। इसके बाद महिला को उस अस्‍पताल ले जाया गया जहां बच्‍ची को भरती कराया गया था। बच्‍ची को देखकर मां की आंखों में आंसू आ गए और उसे गले से लगा लिया। जीआरपी ने मामले की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को दी। एसडीएम पूनम सिंह भी अस्पताल पहुंचीं और महिला से पूछताछ की। मामले की सूचना बाल सुरक्षा अधिकारी रितु रानी व रणवीर कौर को भी दी और वे भी अस्पताल  पहुंच गईं।

महिला ने कहा कि वह बेहद गरीब है और बच्‍ची का पालन पोषण करने में सक्षम नहीं है। उसने अधिकारियों को बताया कि उसकी एक बेटी दादी के पास है। एक बेटा मौसी के पास रहता है। दूसरा बेटा व छोटी बेटी के साथ वह किराये के मकान में रहती है। घर की आर्थिक स्थिति खराब होेने की वजह से वह इस बच्ची को पालने में असमर्थ है आैर उसे किसी सही व्‍यक्ति को गाेद देना चाहती है।

प्रशासनिक अधिकारियों बच्‍ची को गाेद देने कानूनी प्रक्रिया के लिए एसडीएम ने  चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी में एसडीएम, डीएसपी, एसएमओ व तहसीलदार शामिल हैं। 

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