जानें कैसे हुआ था मंदिर शब्द का जन्म, जरूर पढ़े दुनिया का सबसे अद्भुत रहस्य

मंदिर एक ऐस स्थान है जहां जाकर इंसान कुछ पल के लिए दुनिया की सारी चिंताओं से मुक्त हो जाता है। उसे अध्यात्म औऱ शांति की अनुभूति होती है।आप मंदिर जाते तो हैं लेकिन कभी सोचा है कि मंदिर शब्द का वास्तविक अर्थ क्या होता है? कैसे हुई इस शब्द की रचना?

मंदिर का अर्थ:
 
मंदिर शब्द के अर्थ के बारे में कहा जाता है कि ये शब्द ‘मन’ और ‘दर’ की संधि है। मन का द्वार तात्पर्य यह कि जहाँ हम अपने मन का द्वार खोलते हैं, वह स्थान मंदिर है।
मैं के लिए स्थान नहीं:
जिस स्थान पर जाकर हमारा ‘मैं’ यानि अंहकार ‘न’ रहे  वह स्थान मंदिर है। कहा जाता है कि इश्वर हमारे मन में होते हैं। अत: जहाँ ‘ मैं ‘ ‘न’ रह कर केवल ईश्वर हो वह स्थान मंदिर है।
मन से दूर कोई स्थान। मंदिर का शाब्दिक अर्थ ‘घर’ है और मंदिर को द्वार भी कहते हैं- जैसे रामद्वारा, गुरुद्वारा आदि।
आलय सिर्फ शिव का:
‘द्वारा’ किसी भगवान, देवता या गुरु का होता है। ‘आलय’ सिर्फ शिव का होता है और ‍मंदिर या स्तूप सिर्फ ध्यान-प्रार्थना के लिए होते हैं। लेकिन वर्तमान में उक्त सभी स्थान को मंदिर कहा जाता है जिसमें की किसी देव मूर्ति की पूजा होती है। 
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