Kumbh Mela 2019: मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने लगाई डुबकी

मौनी अमावस्या पर महास्नान का पर्व शुरू हो गया है। संगम किनारे जमे श्रद्धालुओं ने 11 बजे रात के बाद से ही स्नान शुरू कर दिया और इसी के साथ आस्था के महाकुंभ में महास्नान का पर्व शुरू हो गया। अमर उजाला आप तक शाही स्नान की पूरी जानकारी लगातार अपडेट करता रहेगा…Kumbh Mela 2019: मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने लगाई डुबकी
अखिल भारतीय श्री पंच दिगम्बर अनी अखाड़ा अपने शिविर से संगम स्नान के लिए निकल चुके हैं।
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री  केशव प्रसाद मौर्य ने पवित्र स्नान पर्व मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम में स्नान किया।
सीएम ने दी शुभकामनाएं 
प्रयागराज कुंभ-2019 के प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों एवं कुंभ में स्नान के लिए देश-विदेश से पधारे पूज्य संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं को सीएम योगी आदित्यनाथ ने हार्दिक शुभकामनाएं दी।
सबसे बड़ा पंचदशनाम जूना अखाड़ा के संतों ने संगम में लगाई डुबकी। इन्हीं के साथ आवाहन और अग्नी अखाड़े के संत भी संगम पर डुबकी लगाने पहुंचे। तीनों अखाड़ों के संत डुबकी लगाने के बाद घाट से प्रस्थान कर रहे हैं। 9.45 बजे तक इन संतों को अपने शिविर में पहुंचना है। इसके बाद बैरागी अखाड़े के संत संगम पर स्नान को पहुंचेंगे।
संगम की रेती की शान अखाड़ों ने मौनी अमावस्या स्नानपर्व पर दूसरी शाही डुबकी लगानी शुरू कर दी है। अखाड़ों में बनाए गए नए नगा साधु दूसरे शाही स्नान की शान बन रहे हैं। संतों,  महामंडलेश्वरों के साथ ही नए बने नागा संन्यासियों में डुबकी लगाने को लेकर सबसे ज्यादा आतुरता देखी जा रही है। संतों के शाही स्नान के लिए अखाड़ों की छावनी से लेकर मुख्य संगम नोज तक खास बैरीकेडिंग की गई है। प्रत्येक अखाड़े को स्नान के लिए चालीस मिनट का समय दिया जा रहा है। अखाड़ों के स्नान के बीच में बीस मिनट के अंतराल में घाट खाली कराने और सफाई की व्यवस्था की गई है।
संगम की रेती की शान अखाड़ों ने मौनी अमावस्या स्नानपर्व पर दूसरी शाही डुबकी लगानी शुरू कर दी है । अखाड़े सिर्फ कुंभ पर्वों में ही स्नान को आते हैं। ऐसे में आस्था, परंपरा और संस्कार के संगम के साथ त्रिवेणी, कुंभ पर्व पर अखाड़ों के शाही स्नान का साक्षी बन रही है।
आज यानि सोमवार को ही मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान है। सभी तेरह अखाड़ों को तीन वर्गों में बांटा गया है। सन्यासी, बैरागी और उदासीन। सबसे पहले सन्यासी अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे, इसके बाद बैरागी और अंत में उदासीन के अंतर्गत आने वाले संत शाही स्नान करेंगे।

सन्यासी अखाड़ों के संन्यासियों के शाही स्नान की शुरुआत सुबह 6.15 बजे शुरू हो गई। सबसे पहले श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और श्री पंचायती अटल अखाड़ा के संतों ने डुबकी लगाई। इन अखाड़ों के संन्यासी 6.15 बजे शाही स्नान के लिए घाट पर पहुंचे। 40 मिनट के भीतर स्नान करके संन्यासी को 6.55 बजे लौट आए। इसके बाद 7.55 बजे तक इन अखाड़ों के संतों,अचार्यों और महामंडलेश्वरों को अपने शिविर में पहुंचना है।

इसके बाद सुबह 7.05 बजे निरंजनी एवं आनंद अखाड़े के संन्यासियों ने डुबकी लगाई। उन्हें 40 मिनट में स्नान करके 7.45 बजे लौटना होगा। तीसरे नंबर पर जूना, अग्नि और आवाहन अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे। इन्हें सुबह आठ बजे शाही घाट पर पहुंचना होगा और 40 मिनट में स्नान करके 8.40 बजे घाट प्रस्थान करना होगा।

इसके बाद बैरागी अखाड़ों के अंतर्गत आने वाले अखाडों के संत शाही स्नान करेंगे। इसमें अनी अखाड़ों के तीनों अखाड़ों में से सबसे पहले पंच निर्मोही अनी अखाड़ा 10.40 बजे घाट पर पहुंचेंगे। इन्हें आधे घंटे का समय दिया गया है। इसके बाद दिगंबर अनी अखाड़ा के संत 11.20 बजे शाही स्नान को पहुंचेंगे। इन्हें 50 मिनट का समय दिया गया है। वहीं पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा को घाट पर 12.20 बजे पहुंचना है। इनके संतों के लिए भी आधे घंटे का ही समय दिया गया है।

अंत में उदासीन अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे, लेकिन बड़ी बात यह है कि उदासीन के संतों को स्नान के लिए सबसे अधिक एक घंटे का समय दिया गया है।

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