जानें कब हैं देव दिवाली, इस दिन क्यों किया जाता है दीपदान

कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है देव दिवाली इस पूर्णिमा का शैव और वैष्णव दोनों ही सम्प्रदायों में बराबर महत्व है. इस दिन शिव जी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था और विष्णु जी ने मत्स्य अवतार भी लिया था. इसलिए इसे देव दिवाली (Dev Diwali 2020) भी कहते हैं. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दीपदान करने का विशेष महत्व है. इस दिन छह कृत्तिकाओं का पूजन भी किया जाता है. इस बार कार्तिक पूर्णिमा 29 और 30 नवंबर को है. पूर्णिमा की रात्रि पूजा 29 नवंबर को होगी. जबकि पूर्णिमा का स्नान और उपवास 30 नवंबर को किया जाएगा.

इस दिन क्यों किया जाता है दीपदान?
कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी के जल से स्नान करके दीपदान करना चाहिए. पर ये दीपदान नदी के किनारे किया जाता है. इसका दीपावली से कोई संबंध नहीं है. लोकाचार की परंपरा होने के कारण वाराणसी में इस दिन गंगा किनारे वृहद स्तर पर दीपदान किया जाता है. इसको वाराणसी में देव दीपावली कहा जाता है, पर ये शास्त्रगत नहीं है.

क्यों कहते हैं देव दिवाली?
भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था. यह घटना कार्तिक मास की पूर्णिमा को हुई थी. त्रिपुरासुर के वध की खुशी में देवताओं ने काशी में अनेकों दीए जलाए. यही कारण है कि हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा पर आज भी काशी में दिवाली मनाई जाती है. चूंकि ये दीवाली देवों ने मनाई थी, इसीलिए इसे देव दिवाली कहा जाता है.

Ujjawal Prabhat Android App Download Link
News-Portal-Designing-Service-in-Lucknow-Allahabad-Kanpur-Ayodhya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button