जानिए क्या होती हैं कामवासना, इसको पढ़कर आपका मन कभी नहीं होगा विचलित

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काम शब्द हमारे शरीर का वो हिस्सा है जो हमें जीने के लिए ऊर्जा और जन्म उत्पत्ति के लिए वासना देता है.काम शब्द शुक्र गृह से संचालित होता है काम शब्द में अथाह प्यार,क्रोध,झूठ, छल,कपट,क्रूरता और आनंद छिपा है, काम शब्द न होता तो स्त्री पुरुष का कभी प्यार ही न होता और न ही जीवन की उत्पत्ति होती . काम जीवन का आधार है.

जो जितना महान आदमी होता है वो उतना ही कामी होता है .हम सब काम वासना के लिए जीते है और काम वासना के लिए कार्य करते है हम बहुत पढ़ते है बहुत धन कमाते है सुंदर शरीर बनाते है अच्छे कपडे पहने है ये सब सुंदर स्त्री प्राप्ति के लिए और वही स्त्री भी करती है एक पुरुष की प्राप्ति के लिए. काम शब्द स्त्री पुरुष के बीच एक चुम्बक है जो आपस में बाँध कर रखता है .अगर ये शब्द न होता तो स्त्री पुरुष का मिलन कभी न होता और न कभी प्यार होता है और न हम इस दुनिआ में जन्म लेते .

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प्यार का वाहन ही काम है प्यार जब होता है तो उसके पीछे काम वासना ही कार्य करती है पर काम छिपा होता है वो चुप रहता है ,जब प्यार अपने चरम सीमा पर होता है तो काम प्रकट हो जाता है. ये काम शब्द संतो के लिए जितना तकलीफ देह है उतना ही भोगी के लिए आनंद दायक है. संतो की पूरी जिंदगी काम ऊर्जा को अपने बस में करने में निकल जाती है फिर भी काम बस में नहीं होता है .काम के दो रूप है एक रूप घृणा और दूसरा आनंद का,जब काम हमारे बस में न रह कर अपना कार्य करता है तो घृणित हो जाता है और जब हमारी इच्छाओ के अनुरूप कार्य करता है तो आनंद दायक हो जाता है.इसलिए काम ऊर्जा का सिर्फ सदुपयोग करो इसके द्वारा होने वाले घृणित कार्य न करो.

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