लखनऊ. केजीएमयू के वीसी डॉ. एमएलबी भट्ट अपनी नियुक्ति को लेकर विवादों में घिर गए हैं। उन पर आरोप है कि 55 प्रोफेसर से सीनियाॅरिटी में कम योग्यता रखने के बावजूद उन्हें नियमों को ताक पर रखकर केजीएमयू का वीसी बना दिया गया। उन पर सपा, बसपा और आरएसएस से जुड़े होने का भी आरोप है। इस मामले में केजीएमयू के पूर्व सीएमएस रहे डॉ. एससी तिवारी ने 55 डॉक्टरों के नामों की लिस्ट जारी करते हुए उन सभी डॉक्टरों के साथ मिलकर सीएम योगी और गवर्नर राम नाइक को लेटर लिखकर वीसी डॉ. भट्ट के खिलाफ शिकायत की है। साथ ही वीसी को हटाकर उनके स्थान पर नए वीसी की नियुक्ति की मांग की है।
क्या है पूरा मामला…?
– केजीएमयू के पूर्व सीएमएस डॉ. एससी तिवारी ने मंगलवार को 55 डॉक्टरों की एक लिस्ट जारी करते हुए आरोप लगाया कि वीसी डॉ. एमएलबी भट्ट इन सभी डॉक्टरों से सीनियाॅरिटी में काफी पीछे हैं। उनके पास केजीएमयू के इन डॉक्टरों से भी कम एक्सपीरियंस है। वे इन डॉक्टरों से बहुत जूनियर हैं, ऐसे में उनका केजीएमयू में वीसी बनाया जाना सही नहीं है।
– डॉ. तिवारी ने 55 डॉक्टरों के साइन वाला एक लेटर भी जारी किया, जिसमें गवर्नर द्वारा डॉ. एमएलबी भट्ट को केजीएमयू का वीसी बनाए जाने के फैसले पर सवाल उठाया गया है। लेटर में ये भी कहा गया है कि डॉ. भट्ट को केजीएमयू वीसी बनाए जाने का गवर्नर राम नाइक का फैसला सही नहीं है।
कौन है डॉ. एमएलबी भट्ट?
– डॉ. भट्ट लखनऊ के जाने-माने कैंसर स्पेशलिस्ट हैं। वे केजीएमयू वीसी बनाए जाने से पहले यहां के रेडियो थेरेपी डिपार्टमेंट में 2015-16 में एचओडी रह चुके हैं। उसके पहले वे लोहिया इंस्टीट्यूट में रेडियोथेरेपी डिपार्टमेंट में कार्यरत थे। केजीएमयू के एक्स वीसी रविकांत के रिटायर होने के बाद 2017 में डॉ. भट्ट को केजीएमयू का वीसी बनाया गया।
कहीं ये वीसी के खिलाफ साजिश तो नहीं?
– बता दें, केजीएमयू में एक्स वीसी रविकांत के समय डॉक्टरों का दो गुट बन गया था। दोनों गुटों के लोगों में रविकांत के केजीएमयू से रिटायर होने के बाद आज तक टकराव जारी है। इनमें से एक ग्रुप है, जिसको आज केजीएमयू के एक्स वीसी रविकांत का खास माना जाता है। वहीं, दूसरा गुट टीचर्स एसोसिएशन से जुड़ा है।
– सूत्रों के मुताबिक, यहां के कई डॉक्टरों की हर रोज एक्स वीसी रविकांत से फोन पर बात होती रहती है। यहां के कुछ डॉक्टर रविकांत के यहां से जाने के बाद भी उनके संपर्क में हैं। आरोप है कि एक्स वीसी रविकांत के इशारे पर ही जानबूझकर वीसी डॉ. एमएलबी भट्ट को फंसाने के लिए ये सारी साजिश रची गई है, क्योंकि रविकांत के खिलाफ शासन स्तर पर नियुक्तियों से लेकर मशीनों की खरीदारी में गड़बड़ी का आरोप लग चुका है।
– योगी सरकार ने रविकांत के खिलाफ जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि वे जानबूझकर अपने खिलाफ चल रही जांच से ध्यान भटकाने के लिए ये सारा खेल कर रहे हैं।
एक्स वीसी के खिलाफ चल रही जांच
– केजीएमयू के एक्स वीसी रविकांत 2014 से लेकर 2017 तक 3 साल के लिए केजीएमयू के वीसी रहे। उनके खिलाफ प्रशासनिक पदों से लेकर प्रोफेसर्स की नियुक्तियों में गड़बड़ी करने का आरोप है।
– उनके खिलाफ जांच, बेड शुल्क और वार्ड शुल्क बढ़ाने का भी आरोप लग चुका है। बीजेपी के नेता कौशल किशोर 2015-16 में उनके खिलाफ गवर्नर राम नाइक को लेटर लिखकर जांच की मांग कर चुके हैं। रविकांत फिलहाल ऋषिकेश स्थित एम्स के डायरेक्टर हैं।
क्या कहना है केजीएमयू का?
-केजीएमयू वीसी डॉ. भट्ट का का कहना है कि उनकी नियुक्ति नियमों के तहत गवर्नर राम नाइक के निर्देश पर हुई है। इसलिए इस मामले पर वे कोई कमेंट नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को उनके वीसी बनाए जाने को लेकर एतराज है, वे अपनी शिकायत करने के लिए स्वतंत्र हैं।