हरियाणा और पंजाब की सियासत में गरमाया एसवाईएल नहर का मुद्दा

चंडीगढ़। हरियाणा में चुनावी बिसात बिछने के साथ ही एक बार फिर एसवाईएल नहर का मुद्दा गरमाने लगा है व इसके जल्‍द ही फिर तूल पकड़ने के आसार हैं। राज्य के प्रमुख विपक्षी दल इनेलो द्वारा हर जिले में गिरफ्तारी आंदोलन चलाने के बाद जहां सत्तारूढ़ भाजपा दबाव में हैं। यही कारण है मनोहरलाल सरकार इस मामले पर अब ‘जल्‍दी’ में है। राज्य सरकार एसवाईएल नहर निर्माण पर हरियाणा के हक में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जल्द लागू कराने के लिए सक्रिय हो गई है। हरियाणा सरकार पूरे मामले की अतिशीघ्र सुनवाई के लिए फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को सलाह दी है कि वह रजिस्ट्रार के पास जाए, ताकि वहां से यह केस सुप्रीम कोर्ट की बेंच के पास पहुंचे।हरियाणा और पंजाब की सियासत में गरमाया एसवाईएल नहर का मुद्दा

हरियाणा सरकार जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची, कोर्ट ने रजिस्ट्रार के पास जाने को कहा

हरियाणा में अगले साल लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव है। पंजाब में भी लोकसभा चुनाव को लेकर माहौल बनने लगा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दो दिन पहले ही चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान कहा है कि राज्य में एसवाईएल अब कोई मुद्दा नहीं है। लेकिन, बुधवार को वह  पूरे मामले की जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची गई। सरकार के इस कदम से साफ लग रहा कि अगले चुनाव में एसवाईएल नहर के निर्माण में देरी बड़ा मुद्दा बनने वाला है। राज्य के विपक्षी दल इनेलो ने इस मुद्दे को समय रहते लपक लिया है।

प्रदेश सरकार नहीं मानती एसवाईएल बनेगा मुद्दा मगर राज्य में बदल रहे सियासी हालात

हरियाणा में दस साल तक सरकार चलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा एसवाईएल नहर निर्माण में देरी के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को जिम्मेदार ठहराते हैं और अभय सिंह चौटाला के गिरफ्तारी आंदोलन पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। लेकिन, हकीकत यह भी है कि चौटाला अपनी पूरी टीम के साथ राज्य में एसवाईएल नहर निर्माण के लिए गिरफ्तारियां देकर सरकार पर दबाव बनाने में पूरी तरह से कामयाब रहे हैं। इस दबाव का नतीजा यह हुआ कि आखिर में मुख्यमंत्री मनोहर लाल को भी कहना पड़ा कि इनेलो के जेल भरो आंदोलन में 500 लोगों को पांच हजार बताकर पेश किया गया है।

गिरफ्तारी आंदोलन के जरिये हरियाणा में माहौल बनाने में कामयाब रहा इनेलो

मुख्यमंत्री का यह बयान आते ही इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते देर नहीं लगाई और आरोप जड़ा कि इसका मतलब यह हुआ कि अधिकारियों ने सरकार को अंधेरे में रखा। दरअसल, एसवाईएल दक्षिण हरियाणा की जीवन रेखा मानी जाती है। हरियाणा के बनने के बाद से इस मुद्दे पर राजनीति होती आई है।

यह बात भी सही है कि भाजपा के शासन काल में एसवाईएल नहर निर्माण के लिए मजबूत पैरवी की गई और सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति संदर्भ पर हरियाणा के हक में अपना फैसला सुनाया, लेकिन बड़ा सवाल यह पैदा हो रहा कि पंजाब ने इस फैसले को मानने से इंकार कर दिया है। नतीजतन एसवाईएल नहर का निर्माण धरातल पर नहीं हो सका और मुद्दा पूरी तरह से बरकरार है।

पंजाब की अलग राजनीति

पंजाब की अपनी अलग राजनीति है। कभी इनेलो के साथ राजनीतिक संबंध रखने वाले शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब में राज करते हुए हरियाणा को उसके हक का पानी नहीं लेने दिया। यही स्थिति पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की है। उन्होंने पूर्व में सीएम रहते हुए एसवाईएल नहर निर्माण तथा पानी के बंटवारे को लेकर हुए तमाम समझौते विधानसभा में रद करवा दिए थे।

अब पंजाब की कमान फिर से कैप्टन अमरिंदर के हाथ में हैं तो वे किसी सूरत में नहीं चाहेंगे कि उनके मुख्यमंत्री रहते हुए एसवाईएल का पानी हरियाणा को भी मिले। लिहाजा इस मुद्दे पर राजनीति कम होने की बजाय बढ़ने के पूरे आसार हैं।

” हमने एसवाईएल नहर निर्माण के लिए जबरदस्त आंदोलन खड़ा किया और सरकार को मजबूर कर दिया है कि वह एसवाईएल नहर निर्माण के लिए केंद्र पर दबाव बनाए। हर जिले में गिरफ्तारियां दी। विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। १८ अगस्त को हम हरियाणा भी बंद करेंगे। हरियाणा को जब तक उसके हिस्से का पानी नहीं मिल जाता, तब तक हम चैन से नहीं बैठने वाले हैं।

                                                                                       – अभय सिंह चौटाला, नेता विपक्ष, हरियाणा।

” एसवाईएल नहर निर्माण पर इनेलो लोगों को गुमराह कर रहा है। इस नहर को नहीं बनने देने में इनेलो ही सबसे बड़ी बाधा रहा है। आज एसवाईएल नहर निर्माण की दिशा में जो भी काम हुआ है, वह सब कांग्रेस के प्रयासों की देन है। मौजूदा भाजपा सरकार आज तक इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री तक से मुलाकात नहीं करा पाई है। उससे कोई अपेक्षा नहीं की जा सकती।

                                                                                       – भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री, हरियाणा।

” विपक्ष की भूमिका बिल्कुल भी रचनात्मक नहीं रही। उसे सिर्फ आलोचना करने के लिए आलोचना करनी है। विपक्ष अपनी भूमिका भूल चुका है। मुद्दाविहीन हो चुका है। इसलिए कभी-कभी बचकानी हरकतें भी देखने को मिल जाती हैं। एसवाईएल आज कोई मुद्दा ही नहीं रहा है। इस पर केवल सुप्रीम कोर्ट का क्रियान्वयन के लिए निर्णय आना है। अन्य राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर केवल राजनीति कर रहे हैं और कुछ नहीं।

                                                                                                – मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा।

” हरियाणा के पास देने के लिए एक बूंद भी फालतू पानी नहीं है। ऐसा कोई भी नकारात्मक मुद्दा पंजाब में संकट का कारण बन सकता है। यह हम होने नहीं देंगे। इसलिए केंद्र से आग्रह है कि वह टेबल पर बैठकर इस मसले का समाधान नहीं निकाले, ताकि पंजाब में भी शांति बनी रहे।

                                                                                            – कैप्टन अमरिंदर सिंह, मुख्यमंत्री, पंजाब।

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