अमेरिका को ईरान की धमकी, परमाणु करार को तोड़ना पड़ सकता है भारी

ईरान के साथ हुए परमाणु करार को तोड़ना अमेरिका को महंगा पड़ सकता है। ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिका इस समझौते को तोड़ता है तो ईरान उसे एक हफ्ते के अंदर इसका जवाब देगा। इस समझौते से निकलने पर अमेरिका निश्चित ही पछतायेगा। रुहानी “राष्ट्रीय परमाणु तकनीक दिवस” पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि हम उनकी उम्मीद से अधिक तैयार हैं। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार परमाणु करार से बाहर निकलने की धमकी देते आ रहे हैं। साथ ही ट्रंप ने 12 मई से देश पर नए प्रतिबंध लगाने की बात कही है। अमेरिका की धमकियों को नकारते हुए रुहानी ने कहा, “बीते पंद्रह महीने से यह सज्जन इस तरह के कोरे दावे कर रहे हैं। इसके बाद उनके व्यवहार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। लेकिन ईरान न्यूक्लियर डील एक मजबूत आधार पर टिका है इसलिए इसकी नींव को हिलाना मुश्किल है।”

अमेरिका और ईरान के साथ ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, चीन, रूस और यूरोपियन यूनियन भी इस समझौते के साझेदार हैं। इन सब का कहना है कि ईरान इस समझौते को लेकर प्रतिबद्ध रहा है। रुहानी ने कहा, ऐसे में अगर अमेरिका इस समझौते से बाहर निकलेगा तो दुनिया में यही संदेश जाएगी कि वह अपने शब्दों पर कायम नहीं रह सका।

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परमाणु ऊर्जा संस्था के प्रमुख ने भी दी अमेरिका को कड़ी चेतावनी

परमाणु समझौते के उल्लंघन को लेकर ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था के प्रमुख अली अकबर सालेही ने अमेरिका को ऐसा कोई कदम नहीं उठाने की नसीहत दी है जिससे कि ईरान और वैश्विक शक्तियों के बीच 2015 में हुआ ऐतिहासिक परमाणु समझौता कमजोर पड़े। सालेही के हवाले से न्यूज एजेंसी सिन्युहा ने कहा कि अगर अमेरिका इस समझौते से पीछे हटा तो ईरान चार दिनों में 20 फीसद संवर्धित यूरेनियम का उत्पादन करने में सक्षम होगा।

सालेही ने कहा कि यह उनके लिए वैज्ञानिक चुनौती होगी और उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका समझौते से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि हम अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रुभता के प्रति काफी गंभीर हैं। लेकिन अगर अमेरिका या यूरोप या कोई दूसरी बड़ी शक्ति इस समझौते से पीछे हटती है तो हम निश्चित तौर पर कुछ अलग करेंगे। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ऐसा कारोबारी बताया जो अप्रत्याशित फैसलों से अपने अंतरराष्ट्रीय एजेंडों को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

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