भारत के इन राज्यों में जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा होगा असर

पृथ्वी के बढ़ते ताप और आर्द्रता से इस सदी के अंत तक भारत का पूर्वोत्तर इलाका सर्वाधिक प्रभावित होगा। इसका अनुमान अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने वैश्विक तापमान मॉडल का अध्ययन कर लगाया है। पुराने अध्ययनों में आर्द्रता जैसे महत्वपूर्ण कारक को नजरअंदाज किया गया था जबकि यह गर्मी के प्रभाव को बढ़ाकर स्थितियां बिगाड़ सकता है।

इन्वॉयरन्मेंटल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि आर्द्रता का आने वाले समय में कई इलाकों में प्रभाव बढ़ेगा। दुनियाभर के करोड़ों लोगों को इसकी वजह से परेशानी उठानी होगी लेकिन इसका सबसे ज्यादा भारत के पूर्वोत्तर इलाकों में रहने वाले लोगों पर असर पड़ेगा। इसके अतिरिक्त दक्षिणी अमेरिका, मध्य और पश्चिमी अफ्रीका, अरब प्रायद्वीप, पूर्वी चीन आदि भी प्रभावित होंगे।

शोधकर्ता इथान कोफेल ने बताया कि इन जगहों पर फिलहाल ऐसी समस्या दिखाई नहीं दे रही है लेकिन आने वाले समय के लिए पहले से तैयार रहना होगा। ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल की मदद से वैज्ञानिकों ने वर्तमान और भविष्य के ‘वेट बल्ब’ तापमान (इसमें गर्मी के साथ आद्रता भी शामिल होती है) का अध्ययन किया। थर्मामीटर के बल्ब पर गीले कपड़े को लपेटकर तापमान मापा गया था।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी साल के एक या दो दिन वेट बल्ब तापमान अधिक होता है। 2070 आते-आते 100 से 250 दिनों के लिए वेट बल्ब तापमान अधिकतम रहेगा। आर्द्रता बढ़ने के कारण वर्तमान के सूखे इलाके और सूखे जाएंगे। साथ ही तटीय इलाके अधिक आर्द्रता से प्रभावित होंगे।

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